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बिहार में चमकी बुखार से अब तक 111 बच्चों की मौत, अस्पताल पहुंचे सीएम नीतीश को करना पड़ा विरोध का सामना

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Jun 18, 2019 11:31 pm IST,  Updated : Jun 18, 2019 11:41 pm IST

जिस वक्त नीतीश कुमार अस्पताल पहुंचे तो वहां बाहर मौजूद लोगों ने उनका विरोध किया। बीमार बच्चों के माता-पिता और रिश्तेदार अस्पताल प्रशासन पर बदइंतजामी के आरोप लगा रहे हैं।

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सीएम नीतीश कुमार को करना पड़ा विरोध प्रदर्शन का सामना Image Source : PTI

पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक्यूट एन्सिफेलाइटिस सिन्ड्रोम यानी चमकी बुखार से बच्चों की मौत का सिलसिला मंगलवार भी जारी रहा। इस बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या मंगलवार को बढ़कर 109 हो गई। आज सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हालात का जायजा लेने के लिए श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल पहुंचे।

अस्पताल में नीतीश कुमार ने मरीज़ों और उनके परिवारवालों से मुलाकात की।  नीतीश कुमार ने अस्पताल में  पीड्रियाटिक वार्ड्स का निरीक्षण किया, डॉक्टर्स से बातचीत की, इसके बाद उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिया कि रोजाना दोपहर तीन बजे मेडिकल बुलेटिन जारी किया जाए।

हालांकि जिस वक्त नीतीश कुमार हॉस्पिटल पहुंचे तो वहां बाहर मौजूद लोगों ने चीफ मिनिस्टर का विरोध किया। बीमार बच्चों के माता-पिता और रिश्तेदार अस्पताल प्रशासन पर बदइंतजामी के आरोप लगा रहे हैं। पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलकर उन्हें अपनी दिक्कतें बताना चाहते थे, लेकिन अस्पताल में एडमिट बच्चों के परिवारों को मुख्यमंत्री से नहीं मिलने दिया गया। इससे नाराज लोगों ने मुख्यमंत्री और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारे लगाए।

ये बोले नीतीश कुमार

उन्होंने कहा कि पूरा इलाका, जो चमकी बुखार (एईएस) से प्रभावित है, उसका वातावरणीय अध्ययन कराकर यह विश्लेषण करना होगा कि इससे बचाव के लिए प्राकृतिक एवं तकनीकी तौर पर क्या किया जा सकता है। गर्मी में अक्सर मच्छर गायब हो जाते हैं, लेकिन उच्च तापमान, अस्वच्छता और आर्द्रता के कारण अगर प्रभावित इलाकों में मच्छर पाए जाते हैं तो उसका भी उपाय करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों के सामाजिक-आर्थिक अध्ययन के साथ-साथ साफ-सफाई के लिहाज से उनके घरों के वातावरण का भी आकलन करना होगा।

उन्होंने अधिकारियों से कहा, ‘‘पेयजल की गुणवत्ता तो कहीं खराब नहीं है, उसकी भी निगरानी करवाइए। एक भी कच्चा घर नहीं रहे, इसके लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के जरिए जो मकान बनाए जाने हैं, उस पर भी ध्यान दीजिए।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि जागरूकता अभियान के साथ-साथ और क्या कुछ करने की आवश्यकता है, हर बिंदु पर गौर करके कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि पीड़ित और मृत बच्चों में लड़के एवं लड़कियों का क्या अनुपात है, इसकी भी जानकारी लीजिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना से भी एक-एक परिवार को अवगत कराना होगा।

अस्पताल की क्षमता बढ़ाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश देते हुए कहा कि इस अस्पताल की क्षमता बढ़ाएं और यहां 2500 बिस्तर की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इस दिशा में अविलंब फैसला लेते हुए तत्काल प्रथम चरण में 1500 बेड का प्रबंध किया जाए। उन्होंने कहा कि यहां एक धर्मशाला का भी निर्माण कराया जाए ताकि मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को रहने की दिक्कत न हो। इससे अस्पताल के अंदर अनावश्यक आवाजाही पर भी रोक लगेगी। 

मुख्यमंत्री ने 50 वर्ष पुराने एसकेएमसीएच के पुनरोद्धार की बात कही और दो साल के अंदर सभी काम पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि 24 घंटे चिकित्सक उपलब्ध हों, इसके लिए अतिरिक्त चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने एसकेएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही को निर्देशित करते हुए कहा कि प्रतिदिन के क्रियाकलापों एवं वर्तमान स्थिति के संदर्भ में अस्पताल में मीडिया ब्रीफिंग का समय निर्धारित करें।

बीमार बच्चों को अस्पताल लाने के लिए किया जाएगा 400 रुपये का भुगतान

पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि बीमार बच्चों को अस्पताल लाने के लिए 400 रुपये का भुगतान किया जाएगा और सभी बीमार बच्चों के इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि पटना मेडिकल कालेज अस्पताल और दरभंगा मेडिकल कालेज अस्पताल से अतिरिक्त चिकित्सकों को एसकेएमसीएच आज भेजा जा रहा है। 
 

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