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पीएम मोदी ने की 'मन की बात', दीपावली की दी शुभकामनाएं, सरदार पटेल और गुरु नानक को किया याद

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Oct 27, 2019 11:17 am IST, Updated : Oct 27, 2019 12:04 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को संबोधित किया। अपने दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी ने पांचवीं बार 'मन की बात' की है।

PM Modi- India TV Hindi
PM Modi

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को संबोधित किया। अपने दूसरे कार्यकाल में पीएम मोदी ने पांचवीं बार 'मन की बात' की है। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने सभी को दीपावली की शुभकामनाएं देने के साथ की। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘आज दीपावली का पावन पर्व है। आप सबको दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं। आजकल दुनिया के अनेक देशों में दिवाली मनायी जाती है। इसमें सिर्फ भारतीय समुदाय शामिल होता है, ऐसा नहीं है बल्कि अब कई देशों की सरकारें, वहां के नागरिक दिवाली को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। एक प्रकार से वहां ‘भारत’ खड़ा कर देते हैं।’’

पीएम ने कहा कि "आइये, हम सभी इस दीपावली पर भारत की नारी शक्ति और उनकी उपलब्धियों को सेलिब्रेट करें यानी "भारत की लक्ष्मी" का सम्मान करें।" भारत की लक्ष्मी की ऐसी अनेक कहानियां लोगों ने share की हैं। आप जरुर पढ़िये, प्रेरणा लीजिये और खुद भी ऐसा ही कुछ अपने आस-पास से share कीजिये और मेरा, भारत की इन सभी लक्ष्मियों को आदरपूर्वक नमन है।

पीएम ने कहा कि "12 नवंबर को दुनिया भर में गुरुनानक देव जी का 550वाँ प्रकाश उत्सव मनाया जाएगा। गुरुनानक देव जी का प्रभाव भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व मे है। गुरुनानकदेव जी मानते थे कि निस्वार्थ भाव से किए गए सेवा कार्य की कोई क़ीमत नहीं हो सकती। पीएम ने कहा कि "अभी कुछ दिन पहले ही, करीब 85 देशों के राजदूत, दिल्ली से अमृतसर गये थे। वहां राजदूतों ने स्वर्ण मंदिर के दर्शन तो किये ही, उन्हें, सिख परम्परा और संस्कृति के बारे में भी जानने का अवसर मिला। इसके बाद कई राजदूतों ने सोशल मीडिया पर वहां की तस्वीरें साझा की। 

पीएम ने कहा कि "गुरु नानक देव जी  ने अपना संदेश, दुनिया में, दूर-दूर तक पहुँचाया। वे अपने समय में सबसे अधिक यात्रा करने वालों में से थे,  गुरु नानक का प्रकाश पर्व हमें उनके विचारों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दे।" उन्होंने कहा कि "31 अक्तूबर की तारीख आप सबको याद होगी। भारत के लौह पुरुष सरदार पटेल की जन्म जयंती का है जो देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाले महानायक थे। सरदार साहब की कार्यशैली के विषय में जब पढ़ते हैं, सुनते हैं, तो पता चलता है कि उनकी प्लानिंग कितनी जबरदस्त होती थी।"

पीएम मोदी ने कहा कि "सरदार पटेल बारीक-से-बारीक चीजें को भी बहुत गहराई से देखते थे, परखते थे। सही मायने में , वे 'मैन ऑफ डिटेल' थे। सरदार साहब की कार्यशैली के विषय में जब पढ़ते हैं, सुनते हैं, तो पता चलता है कि उनकी प्लानिंग कितनी जबरदस्त होती थी।" उन्होंने 1921 में अहमदाबाद में कांग्रेस अधिवेशन में पानी की व्यवस्था, जूते या कोई सामान के लिये खादी के थैले का प्रबंध आदि के विषय में सरदार पटेल की योजना और कार्यशैली की तारीफ़ करते हुए एक घटना का उदाहरण भी दिया।

उन्होंने कहा कि "संविधान सभा में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिए हमारा देश, सरदार पटेल का सदैव कृतज्ञ रहेगा। उन्होंने मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया, जिससे जाति और संप्रदाय के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव की गुंजाइश न बचे।" पीएम ने कहा कि "भारत के प्रथम गृहमंत्री के रूप में सरदार पटेल ने, रियासतों को, एक करने का ऐतिहासिक काम किया। एक तरफ उनकी नज़र हैदराबाद, जूनागढ़ और अन्य राज्यों पर केन्द्रित थी, वहीं उनका ध्यान दूर-सुदूर दक्षिण में लक्षद्वीप पर भी था।"

उन्होंने कहा कि "लक्षद्वीप कुछ द्वीपों का समूह है। 1947 में भारत विभाजन के तुरंत बाद हमारे पड़ोसी की नज़र लक्षद्वीप पर थी और उसने अपने झंडे के साथ जहाज भेजा था। सरदार पटेल ने बगैर समय गंवाये, तुरंत, कठोर कार्यवाही शुरू कर दी। पीएम ने कहा कि "सरदार साहब की याद में बना ‘Statue of Unity’ देश और दुनिया को समर्पित किया गया था। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। अमेरिका में स्थित ‘Statue Of Liberty’ से भी ऊंचाई में दोगुनी है। मुझे आशा है कि आप सभी लोग अपने कीमती समय से कुछ वक़्त निकाल कर Statue of Unity देखने जाएंगे।"

पीएम मोदी ने कहा कि "2014 से हर साल 31 अक्टूबर को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ मनाया जाता है । यह दिन, हमें, अपने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की हर कीमत पर रक्षा करने का सन्देश देता है। 31 अक्टूबर को, हर बार की तरह 'Run For Unity' का आयोजन भी किया जा रहा है। मुझे उम्मीद है कि आप सब 31 अक्टूबर को ज़रूर दौड़ेगें। भारत की एकता के लिए, ख़ुद की फिटनेस के लिये भी।"

उन्होंने कहा कि "सितम्बर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जरा उन दिनों को याद कीजिये। भांति-भांति के कितने लोग मैदान में आ गये थे। कैसे-कैसे Interest Groups उस परिस्थितियों का अपने-अपने तरीके से फ़ायदा उठाने के लिए खेल रहे थे।" उन्होंने कहा कि "कुछ बयानबाजों ने, बड़बोलों ने सिर्फ और सिर्फ खुद को चमकाने के इरादे से न जाने क्या-क्या बोल दिया था, हमें सब याद है। लेकिन ये सब, पांच दिन, सात दिन, दस दिन, चलता रहा, लेकिन, जैसा ही फैसला आया, एक आनंददायक, आश्चर्यजनक बदलाव देश ने महसूस किया।"

पीएम ने कहा कि "एक तरफ़ दो हफ़्ते तक गर्माहट के लिए सब कुछ हुआ था, लेकिन, जब राम जन्मभूमि पर फैसला आया तब सरकार ने, राजनैतिक दलों ने, सामाजिक संगठनों ने, civil society ने, सभी सम्प्रदायों के प्रतिनिधियों ने, साधु-संतों ने बहुत ही संतुलित और संयमित बयान दिए। मुझे वो दिन बराबर याद है। जब भी उस दिन को याद करता हूं मन को खुशी होती है। न्यायपालिका की गरिमा को बहुत ही गौरवपूर्ण रूप से सम्मान दिया और कहीं पर भी गर्माहट का, तनाव का माहौल नहीं बनने दिया। एकता का स्वर, देश को, कितनी बड़ी ताकत देता है उसका यह उदाहरण है।"

उन्होंने कहा कि "31 अक्टूबर, हमारे देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा जी की हत्या भी उस दिन हुई थी। देश को एक बहुत बड़ा सदमा लगा था। मैं आज उनको भी श्रद्धांजलि देता हूं।"

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