1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. क्या हैं कृषि क्षेत्र में सुधार के वे 3 बिल जिनको लेकर हो रहा है हंगामा?

क्या हैं कृषि क्षेत्र में सुधार के वे 3 बिल जिनको लेकर हो रहा है हंगामा?

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 17, 2020 09:16 pm IST,  Updated : Sep 18, 2020 11:18 pm IST

विपक्ष आरोप लगा रहा है कि बिल के जरिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को हटाना चाहती है। विपक्ष इन तीनों विधेयकों को किसान विरोधी बता रहा है।

What are agriculture bills for which government facing...- India TV Hindi
What are agriculture bills for which government facing opposition on parliament Image Source : PTI

कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार की तरफ से संसद में 3 बिल पेश हुए हैं। सरकार पहले ही अध्याधेश के जरिए नियम लागू कर चुकी है, पर क्योंकि अब संसद सत्र शुरू हो चुका है तो इसे संसद से पास कराना भी जरूरी है। हरियाणा और पंजाब में कई जगहों पर इस बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ है और पंजाब से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने तो विरोध में मोदी कैबिनेट से त्यागपत्र तक दे दिया है।

पहला बिल, जरूरी वस्तु अधिनियम 2010 (Essential Commodity Act 2010) में सुधार को लेकर है। सुधार के जरिए कृषि क्षेत्र की कायापलट करना और किसानों की आय बढ़ाना मकसद है। किसानों को अपनी फसल स्टॉक करने या बेचने का अधिकार दिया गया है। मौजूदा जरूरी वस्तु अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति जरूरी वस्तुयों का तय लिमिट से ज्यादा स्टॉक नहीं कर सकता। लेकिन नए बिल के जरिए किसानों को छूट होगी और बिल के जरिए कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र और एफडीआई का निवेश बढ़ने की बात कही गई है। बिल में कहा गया है कि किसान जब भी किसी जरूरी फसल का ज्यादा उत्पादन करते हैं तो बाजार में उस फसल का भाव गिर जाता है और किसानों को नुकसान होता है। बिल में किसानों की फसल के लिए पर्याप्त प्रोसेसिंग व्यवस्था किए जाने का प्रावधान है ताकि उपज को खराब होने से रोका जा सके।

ALSO READ: दिल्ली में स्कूल खोलने को लेकर केजरीवाल सरकार का फैसला, जानिए कबतक रहेंगे बंद

ALSO READ: चीन में फैल रही नई बीमारी, हजारों लोग संक्रमित, जानिए क्या हैं लक्षण

ALSO READ: रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, इन राज्यों के लिए चलेंगी और क्लोन ट्रेनें

ALSO READ: अब आप बांस से बने बिस्कुट खा सकेंगे

दूसरा बिल Farming Produce Trade and Promotion है, जिसमें APMC एक्ट में सुधार की बात कही गई है। फिलहाल मौजूदा व्यवस्था के तहत APMC एक्ट के जरिए किसानों को अपनी फसल मंडी में बेचने के लिए बाध्य होना पड़ता है लेकिन सरकार ने जो सुधार किया है उसके तहत किसान कहीं भी अपनी फसल बेच सकेंगे। मंडियों में बैठे आढ़तियों को बेचने पर मजबूर होना पड़ता है लेकिन जो सुधार किया गया है उसके तहत किसान अपनी फसल किसी को भी बेच सकेंगे।

तीसरे बिल में किसानों को उनकी उपज का जायज भाव दिलाने की बात कही गई है और उसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को बनाए रखा गया है। साथ में किसान चाहें तो फसल लगाने से पहले ही प्रोसेसर, एग्रिगेटर, बड़े रिटेलर या निर्यातक से करार कर सकता है। इससे किसान को यह लाभ होगा कि फसल का भाव अगर बाजार ऊपर नीचे भी हुआ तो भी उसे वही भाव मिलेगा जिसपर उसने करार किया हुआ है।

अब विरोध की बात करें तो विपक्ष आरोप लगा रहा है कि बिल के जरिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था को हटाना चाहती है। विपक्ष इन तीनों विधेयकों को किसान विरोधी बता रहा है। गुरुवार को मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि APMC एक्ट खत्म होने से कृषि उपज खरीद व्यवस्था खत्म हो जाएगी और इससे किसानों को तो कोई लाभ नहीं होगा साथ में मंडियों में काम करने वाले आढ़तियों, मुनीम, ढुलाईदारों और ट्रांसपोर्टरों का रोजगार खत्म होगा। कांग्रेस ने कहा कि अगर किसान की फसल कंपनियां खरीदना शुरू कर देंगी और मंडियों में फसल नहीं बिकेगी तो राज्य सरकारों को मंडी फीस से होने वाली आय खत्म हो जाएगी। कांग्रेस ने कहा कि स्टॉक लिमिट हटने का फायदा किसान को नहीं होगा बल्कि मुट्ठीभर लोगों को मिलेगा।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत