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चंद्रयान-3 के पेलोड ने पहली बार मापा चंद्रमा की सतह का तापमान, बताया चांद की मिट्टी का कैसे बदलता है ताप

 Published : Aug 27, 2023 06:46 pm IST,  Updated : Aug 27, 2023 06:46 pm IST

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चांद की सतह का तापमान क्या है और ये किस प्रकार बदलता है। इस बारे में अब तक दुनिया को कोई जानकारी नहीं है। मगर भारत द्वारा भेजे गए चंद्रयान 3 के पेलोड विक्रम लैंडर ने चांद की सतह का भ्रमण करके दिन भर चांद की मिट्टी के ताप का आकलन किया। अब इसे इसरो ने ग्राफ के तौर पर प्रस्तुत किया है।

चंद्रमा की सतह के तापमान का ग्राफ।- India TV Hindi
चंद्रमा की सतह के तापमान का ग्राफ। Image Source : ISRO

चांद के दक्षिणी ध्रुव की हर पहेली से अब तक दुनिया अंजान है, मगर भारत का चंद्रयान 3 लगातार चंद्रमा के चौंकाने वाले रहस्योद्घाटन करता जा रहा है। अब चंद्रयान 3 के पेलोड विक्रम लैंडर ने चांद की मिट्टी के तापमान का आकलन किया है। दुनिया को अब पहली बार पता चलेगा कि चंद्रमा पर सतह का ताप किस तरह परिवर्तित होता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पेलोड द्वारा मापे गए विभिन्न समय के ताप को एक ग्राफ के रूप में प्रस्तुत किया है।  इसरो ने चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के साथ लगे ‘चेस्ट’ उपकरण द्वारा चंद्र सतह पर मापी गई तापमान भिन्नता का एक ग्राफ रविवार को जारी किया।

अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, ‘चंद्र सर्फेस थर्मो फिजिकल एक्सपेरिमेंट’ (चेस्ट) ने चंद्रमा की सतह के तापीय व्यवहार को समझने के लिए, दक्षिणी ध्रुव के आसपास चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी का ‘तापमान प्रालेख’ मापा। इसरो ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यहां विक्रम लैंडर पर चेस्ट पेलोड के पहले अवलोकन हैं। चंद्रमा की सतह के तापीय व्यवहार को समझने के लिए, चेस्ट ने ध्रुव के चारों ओर चंद्रमा की ऊपरी मिट्टी के तापमान प्रलेख को मापा।’’ पेलोड में तापमान को मापने का एक यंत्र लगा है जो सतह के नीचे 10 सेंटीमीटर की गहराई तक पहुंचने में सक्षम है। इसरो ने कहा, ‘‘इसमें 10 तापमान सेंसर लगे हैं। ग्राफ में पाया गया है कि चंद्रमा की सतह का तापमान भिन्न समय में भिन्न-भिन्न दर्ज किया गया है। अब इसका विस्तृत अवलोकन कई दिनों तक करने के बाद इसरो ताप को लेकर कोई सटीक विश्लेषण पेश कर सकता है।

दधिणी ध्रुव का पहली बार दुनिया के सामने खुल रहा रहस्य

इसरो द्वारा प्रस्तुत ग्राफ विभिन्न गहराइयों पर चंद्र सतह/करीबी-सतह की तापमान भिन्नता को दर्शाता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के लिए ये पहले ऐसे प्रालेख हैं। विस्तृत अवलोकन जारी है।’’ पेलोड को भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद के सहयोग से इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) की अंतरिक्ष भौतिकी प्रयोगशाला (एसपीएल) के नेतृत्व वाली एक टीम द्वारा विकसित किया गया था। अंतरिक्ष अभियान में बड़ी छलांग लगाते हुए भारत का चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ बुधवार को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, जिससे देश चांद के इस क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला तथा चंद्र सतह पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। (भाषा)

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