साउथ-वेस्टर्न कमांड के लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा कि हम कई वर्षों से आतंकवाद का सामना कर रहे हैं, लेकिन 2014 के बाद हमने अपनी नीति बदली। यदि उरी में हमला हुआ तो हमने 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक की। 2019 में जब पुलवामा हमला हुआ तो हमने बालाकोट एयरस्ट्राइक की। जब 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने पाकिस्तान से समर्थन लेकर पहलगाम में हमला किया और हमारे 26 निर्दोष देशवासियों जिनमें एक नेपाल के नागरिक और 25 भारतीय थे- को बेरहमी से मार गिराया, तो यह धर्म के नाम पर की गई अत्यंत दर्दनाक और कायराना कार्रवाई थी। उन्होंने महिलाओं के सामने लोगों को मारा और धर्म के आधार पर उनसे भेदभावपूर्ण सवाल पूछे। इससे पूरे देश में व्यापक आक्रोश था। इसका जवाब देना आवश्यक था। लेकिन हमारा देश एक शांतिप्रिय राष्ट्र है।
'यह युद्ध का युग नहीं है लेकिन यह आतंकवाद का युग भी नहीं हो सकता'
मनजिंदर सिंह ने इंडिया टीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि हमारे प्रधानमंत्री का स्पष्ट मार्गदर्शन था- “यह युद्ध का युग नहीं है लेकिन यह आतंकवाद का युग भी नहीं हो सकता।” इसलिए इस हमले का जवाब देने के लिए हमें आतंकवादियों को करारा उत्तर देना था। राजनीतिक निर्देश स्पष्ट थे- आतंकवादियों को जवाब देना है, उनके सपोर्ट-बेस, फंडिंग और पूरे इको-सिस्टम पर प्रहार करना है। साथ ही कोई भी आतंकी हमला ‘एक्ट ऑफ वॉर’ माना जाएगा। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस अभियान का नाम ऑपरेशन सिन्दूर रखा गया, जिससे पूरे ऑपरेशन का उद्देश्य और हमारी दृढ़ता साफ दिखाई देती है।
'विजयी वही होता है जो समय के साथ चलता है'
मनजिंदर सिंह ने कहा कि जैसे‑जैसे देश विकसित होता है, वैसे‑वैसे खतरे भी बढ़ते हैं। फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने कहा था कि विजयी वही होता है जो समय के साथ चलता है। समय के साथ हमारे खतरे भी बदलते हैं और इसी वजह से हमें उसी प्रकार की तैयारी करनी पड़ती है। यह समझना बहुत जरूरी है कि खतरे किस तरह सामने आ रहे हैं। सबसे पहले तो, इस समय दुनिया में बड़ा बदलाव आ रहा है। दुनिया में इस समय बहुत बड़ा बदलाव आ रहा है, जिसे हम Changing World Order कह सकते हैं। पहले जो व्यवस्था बाइपोलर थी, वह अब मल्टी‑पोलर वर्ल्ड में बदल गई है। शक्ति के केंद्र भी बिखर रहे हैं, इसी कारण पूरा सिस्टम काफी अस्थिर (volatile) चल रहा है।
'हमारा सपना है 2047 तक विकसित भारत का निर्माण हो'
मनजिंदर सिंह ने इंडिया टीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि देश के भीतर भी कई तरह के खतरे मौजूद हैं- जिनमें आतंकवाद, हाइब्रिड थ्रेट, साइबर थ्रेट जैसे अनेक खतरे शामिल हैं। हमारा सपना है कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण हो और यही हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। इसी कारण मिलिट्री को भी अपनी तैयारियों को उसी दिशा में आगे बढ़ाना होगा। हमें स्पष्ट राजनीतिक दिशा मिली है- ‘Any Act of Terror is considered an Act of War’। ऐसी स्थिति में, जब हमें ऐसा कोई संकेत मिलता है तो एक मिलिट्री कमांडर के तौर पर इन सभी खतरों के लिए तैयारी करना अनिवार्य होता है- शांतिपूर्ण समय से लेकर फुल स्पेक्ट्रम वॉर तक की तैयारी। हम इसके लिए सैनिकों की ट्रेनिंग, उपकरण (Equipment) का फिट रहना- इन सभी पर काम कर रहे हैं। इसलिए हम हर स्तर पर तैयारी कर रहे हैं।
'रात में 70% और सुबह 30% ट्रेनिंग कर रहे जवान'
आगे उन्होंने बताया, हम ट्रेनिंग, उपकरण, मनोबल और मोटिवेशन- सभी को साथ लेकर चल रहे हैं ताकि हमारी यूनिट ऑपरेशनली इफेक्टिव बन सके। उपकरणों पर हमारा पूरा फ़ोकस है और हम उन्हें पूरी तरह से सही स्थिति में रख रहे हैं। नई ट्रेनिंग के लिए हम नई-नई बटालियन तैयार कर रहे हैं। अश्विनी प्लाटून है जो ड्रोन वॉरफेयर में अपनी क्षमता को मजबूत कर रही है। भैरव लाइट बटालियन है, जो स्पेशल फोर्सेज के साथ मिलकर काम करेगी और दिव्यास्त्र बैटरी है, जो लॉटेरिंग म्यूनिशन (Loitering Munition) के साथ सक्षम होगी। साथ ही साइबर वॉरफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर- इन दोनों को कमांड लेवल पर खड़ा किया गया है, जो हमें साइबर खतरों और इलेक्ट्रॉनिक खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। इसीलिए ये हमारी नई तैयारी है और इसकी पूरी ट्रेनिंग चल रही है। Realistic फोकस के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसी वजह से हम अपनी 70% ट्रेनिंग रात में और 30% सुबह के समय कर रहे हैं ताकि हमारे सभी जवानों और अधिकारियों को बिल्कुल वास्तविक अर्थात् युद्ध जैसे हालात में प्रशिक्षण मिल सके।
'देशवासियों को जो भरोसा दिया है, उस पर खरे उतरेंगे'
मनजिंदर सिंह ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने केवल चार दिन की लड़ाई लड़ी थी लेकिन यह संभव है कि भविष्य में हमें लंबी लड़ाई का सामना करना पड़े। इसलिए कमांड स्तर पर सर्वे कराकर भूमिगत भंडारण, गोला-बारूद, राशन आदि के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की गई है और आवश्यकतानुसार रिज़र्व फोर्स भी बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। साथ ही राज्य स्तर पर भी हमने मजबूत कार्य-समन्वय व्यवस्था बनाई है ताकि बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, राज्य की इंटेलिजेंस एजेंसियों, सीआरपीएफ और अन्य एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल किया जा सके। इस उद्देश्य से प्रत्येक तिमाही में बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हम हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। हमारे ऑपरेशन आगे भी बढ़ते रहेंगे- खतरा चाहे जैसा भी हो, हम उसके लिए तैयार रहेंगे और अपने देशवासियों को जो भरोसा हमने दिया है, उस पर हमेशा खरे उतरेंगे।''
1971 के युद्ध पर क्या बोले लेफ्टिनेंट जनरल?
देशवासियों को एक बड़ा संदेश देते हुए सिंह ने कहा, ''1971 का युद्ध एक बहुत बड़ा गौरवशाली अध्याय था और मैं उन सभी सैनिकों को सैल्यूट करता हूं जिन्होंने उसमें भाग लिया। इस युद्ध में 91,000 से अधिक सैनिकों को बंदी बनाया गया जो पहले कहीं नहीं हुआ था। आज 54 वर्ष बाद देश बहुत आगे बढ़ चुका है और हम हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पूरा देश एकजुट होकर किसी भी खतरे का मुकाबला करेगा। सैन्य दृष्टि से भी यदि कोई खतरा या चुनौती आती है तो उससे निपटने के लिए हम पूरी तरह सक्षम और तत्पर हैं। मैं पूरे राष्ट्र को यह विश्वास दिलाता हूं कि चाहे कोई भी चुनौती हो और जैसी भी हो, उसका सामना करने के लिए हम हमेशा तैयार और तैनात हैं।''
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