'ऋण, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों के हल के लिए जी-20 देशों के साथ काम करेगा भारत'

G20 Summit: जयशंकर ने उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में अपने संबोधन में कहा, "हम इस साल दिसंबर में जी-20 की अध्यक्षता शुरू कर रहे हैं और हम विकासशील देशों के समक्ष मौजूद चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं।"

Malaika Imam Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published on: September 25, 2022 20:00 IST
External Affairs Minister S. Jaishankar- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO External Affairs Minister S. Jaishankar

G20 Summit: भारत के जी-20 की अध्यक्षता संभालने से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि उनका देश ऋण, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए इस प्रभावशाली समूह के अन्य सदस्यों के साथ काम करेगा। जी-20 समूह दुनिया की विकसित एवं विकाशसील अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच है। भारत 01 दिसंबर, 2022 से लेकर 30 नवंबर 2023 तक के लिए जी-20 की अध्यक्षता संभालेगा। अपनी अध्यक्षता के दौरान भारत की ओर से दिसंबर, 2022 से पूरे देश में जी-20 की 200 से अधिक बैठकों की मेजबानी करने की संभावना है। 

राष्ट्राध्यक्ष के स्तर पर जी-20 नेताओं का सम्मेलन नई दिल्ली में 9-10 सितंबर, 2023 को होने का कार्यक्रम है। जयशंकर ने शनिवार को यहां उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में अपने संबोधन में कहा, "हम इस साल दिसंबर में जी-20 की अध्यक्षता शुरू कर रहे हैं और हम विकासशील देशों के समक्ष मौजूद चुनौतियों के प्रति संवेदनशील हैं।" 

सुधार हमारी मूल प्राथमिकताओं में एक बना रहेगा: विदेश मंत्री

उन्होंने 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा से कहा कि भारत ऋण, आर्थिक वृद्धि, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा और खासकर पर्यावरण के गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए जी-20 के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर काम करेगा। उन्होंने कहा, "इस बहुपक्षीय वित्तीय संगठन के कामकाज में सुधार हमारी मूल प्राथमिकताओं में एक बना रहेगा।" जयशंकर ने यह भी कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को भी अपने स्थायित्व एवं सुरक्षा को लेकर नई चिंता है। उनकी टिप्पणी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में चीन की आक्रामक कार्रवाई के बीच आई है। 

उन्होंने कहा कि वैसे तो विश्व का ध्यान यूक्रेन पर केंद्रित है, लेकिन भारत को खासकर अपने पड़ोस में अन्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। परोक्ष रूप से उनका इशारा पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के अब तक तक नहीं सुलझने और पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण संबंध की ओर था। उन्होंने कहा, "उनमें से भले ही कुछ चुनौती कोविड महामारी एवं वर्तमान संघर्षों के चलते बढ़ गई हो, लेकिन वह मुश्किलों की गंभीरता को बयां करती है। कमजोर अर्थव्यवस्था में ऋणग्रस्तता भी खास चिंता का कारण है।" 

'अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकीर्ण राष्ट्रीय एजेंडा से ऊपर उठना चाहिए'

जयशंकर ने कहा कि भारत का मानना है कि ऐसे दौर में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकीर्ण राष्ट्रीय एजेंडा से ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ओर से इस असाधारण दौर में असाधारण कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा, "जब हम मानवीय जरुरतों में अंतराल को पाटते हैं, तो राजनीतिक जटिलताएं अनसुलझी रह जाती है।" उन्होंने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में 50,000 मीट्रिक टन गेहूं और दवाइयों और टीके की कई खेप भेजे। साथ ही, श्रीलंका को ईंधन, जरूरी वस्तुओं आदि के लिए 3.8 अरब डॉलर का ऋण दिया, म्यांमा को 10,000 मीट्रिक ट्रन की खाद्य सहायता एवं टीके उपलब्ध कराए। 

विदेश मंत्री ने कहा, "चाहे आपदा राहत हो या मानवीय सहायता, भारत खासकर अपने निकटतम पड़ोसियों की मदद करने में मजबूती से डटा रहा है।" जी 20 में अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं। जी 20 देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 85 फीसद हिस्से का योगदान करते हैं।

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