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'न्यू दिल्ली मूवमेंट' से बदलेगा वर्ल्ड ऑर्डर का चेहरा, रायसीना डायलॉग में बोले फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : Mar 05, 2026 11:42 pm IST, Updated : Mar 05, 2026 11:42 pm IST

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने रायसीना डायलॉग में भारत की विदेश नीति की तारीफ की। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत कई गणमान्य हस्तियां इस मौके पर मौजूद रही।

फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब - India TV Hindi
Image Source : PM MODI YOUTUBE CHANNEL SCREEN SHOT फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब

नई दिल्ली: फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने रायसीना डायलाग में भारत की विदेश नीति की तारीफ करने के साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् की स्थाई सदस्यता मिलनी चाहिए।  उन्होंने कहा कि मौजूदा रूल्ड बेस्ड वर्ल्ड ऑर्डर दम तोड़ चुका है और अब दुनिया को एक नए रास्ते की जरूरत है। इसमें भारत की भूमिका सबसे अहम है। अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि नई दिल्ली को वर्ल्ड ऑर्डर को बदलने की अगुवाई करनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने 'न्यू दिल्ली मूवमेंट' का सुझाव रखा।

पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाला युग समाप्त हो रहा 

उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाला युग समाप्त हो रहा है और ग्लोबल साउथ की शक्ति तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में भारत दुनिया को रास्ता दिखा सकता है कि कॉन्फ्लिक्ट और विवादों से भरी दुनिया में नया वर्ल्ड ऑर्डर क्या होना चाहिए?  यह विश्वास और सहयोग पर आधारित होना चाहिए। 

विदेश मंत्री जयशंकर की तारीफ

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने विदेश मंत्री जयशंकर की तारीफ की और उनके एक बयान का जिक्र किया कि यूरोप की समस्या वर्ल्ड की समस्या है लेकिन वर्ल्ड की समस्या यूरोप की समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया में जारी युद्ध और समस्याओं के लिए हमें मिलकर काम करने की जरूरत है।वर्ल्ड वार 2 के बाद उभरा लिबरल वर्ल्ड ऑर्डर अब मृत हो चुका है। अगर हम अंतरराष्ट्रीय नियमों को नहीं मानते हैं तो मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर ध्वस्त हो जाएगा हो जाएगा। भारत से हमें बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। आजादी के बाद से ही भारत की विदेश नीति सर्वतोन्मुखी रही है। परस्पर सहयोग की भावना से विश्व को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। भारत ने गुटनिरपेक्षता के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पार्टनरशिप को आगे बढ़ाया । यूरोप को भारत से यह सीखना चाहिए। 

इंडिया की ताकत एक्टिव इंगेजमेंट

उन्होंने कहा कि इंडिया की ताकत एक्टिव इंगेजमेंट पर है। यह कलेक्टिव सिक्योरिटी को भी प्रधानता देता है। इंडिया ने अपने आपको आइसोलेट नहीं किया। हाल में यूरोपियन यूनियन के साथ ही उसकी संधि काफी अहम रही है। भारत का संबंध म्यूचुअल रिस्पेक्ट और कॉमन इंटेरेस्ट पर आधारित रहा है। 

कौटिल्य के अर्थशास्त्र का किया उल्लेख

फिनलैंड के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कौटिल्य और उसके अर्थशास्त्र का उल्लेख किया और कहा कि दुनिया को एक व्यवस्थित दिशा देने की झलक इसमें मिलती है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारत की अहम भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि  WTO और ट्रैड सिस्टम में इंडिया की लीडरशिप की जरूरत है। एआई का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एआई लाइफ चेंजिंग टेक्नोलॉजी है। एआई में इंडिया अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने रीजनल इंस्टीट्यूशन को जीवंत बनाने पर भी जोर दिया।

न्यू दिल्ली मूवमेंट का सुझाव

उन्होंने कहा कि आज के समय में एक डिग्निफाइड फॉरेन पॉलिसी की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए वर्ल्ड लीडर्स को आगे आना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को दुनिया के नेताओं को दिल्ली आमंत्रित करना चाहिए ताकि एक नए कोऑपरेटिव वर्ल्ड ऑर्डर की नींव रखी जा सके। इसके लिए उन्होंने 'न्यू दिल्ली मूवमेंट'शुरू करने का सुझाव रखा। 

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