Saturday, March 07, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. Rajat Sharma's Blog | रूस से तेल की छूट बेकार की बात, भारत तो पहले ही खरीद रहा था

Rajat Sharma's Blog | रूस से तेल की छूट बेकार की बात, भारत तो पहले ही खरीद रहा था

Written By: Rajat Sharma @RajatSharmaLive Published : Mar 07, 2026 07:10 pm IST, Updated : Mar 07, 2026 07:10 pm IST

जहां तक भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाज़त का सवाल है, न किसी ने इजाज़त मांगी, न किसी ने इजाज़त दी। भारत पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, भारत आज भी रूस से तेल खरीदता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कोई मेहरबानी नहीं की। ये तो अपनी नाकामी छुपाने का तरीका है।

Rajat sharma Indiatv- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

भारत पर ईरान और अमेरिका की जंग का पहला सीधा असर दिखाई दिया। रूस से कच्चे तेल का आयात और बढ़ गया। अमेरिका को कहना पड़ा कि जंग के कारण खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई बंद है, इससे ईंधन का संकट  पैदा हो सकता है। अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बैसेंट ने ऐलान किया कि अमेरिका ने भारत को रूस से तीस दिन तक कच्चा तेल  खरीदने की छूट दी है और ये छूट अस्थायी है। भारत रूस से तेल खरीदेगा, हालांकि भारत रूस से कच्चे ताल का आयात पहले ही बढ़ा चुका है। लेकिन अमेरिकी वित्त मंत्री ने जिस अंदाज से और जिन लफ्ज़ों से भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट देने का ऐलान किया, वो हैरान करने वाला है।

अमेरिकी वित्त मंत्री के ऐलान को लेकर विरोधी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सवालों की बौछार कर दी, देश को अमेरिका के सामने गिरवी रखने का इल्जाम लगाया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, RJD से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक, सबने मोदी पर हमले किए। लेकिन सवाल ये है कि अमेरिका से अनुमति मांगी किसने ? क्या स्कॉट बेसेंट के बयान से पहले भारत ने रूस से तेल का आयात बंद कर दिया था? भारत रूस से कितना तेल खरीद रहा है?

स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि जानबूझ कर इतने कम दिनों के लिए भारत को इसलिए रियायत दी जा रही है क्योंकि इससे रूस सरकार को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा। अमेरिका सिर्फ उन्हीं तेल सौदों को मंजूरी दे रहा है, जिनके तहत तेल लेकर टैंकर पहले से निकल चुके हैं और ईरान युद्ध के कारण समुद्र में फंसे हैं। स्कॉट बेसेंट के इस ट्वीट की टाइमिंग और उसकी भाषा राजनयिक शिष्टाचार के खिलाफ है। उनका ये बयान भारत में सियासी मुद्दा बन गया।

इसके बाद अमेरिका के विदेश उपसचिव क्रिस्टोफर लैंडौ ने एक और ऐसी बात कही जिसने विरोधी दलों को मोदी सरकार पर वार करने का एक और मौका दिया। दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग में अमेरिकी विदेश उप सचिव ने कहा कि अमेरिका ने पिछली गलतियों से सबक सीखा है, अब अमेरिका भारत को उतनी छूट नहीं देगा, जितनी अमेरिका ने 20 साल पहले चीन को दी थी। क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा,  "भारत को ये समझना चाहिए कि अमेरिका अब वो गलती नहीं करेगा, जो उसने बीस साल पहले चीन के मामले में की, अमेरिका ने चीन को रियायतें दी, आर्थिक विकास में चीन की मदद की और आज चीन अमेरिका का प्रतिद्वन्द्वी बन गया, अमेरिका अब एक और प्रतिद्वन्द्वी नहीं चाहता, इसलिए भारत से पहले अमेरिकी हितों का ध्यान रखा जाएगा।"

अमेरिका अपने हितों को देख रहा है, इसमें कोई बुराई नहीं हैं, लेकिन वो ये दिखाने की कोशिश कर रहा है कि भारत किस देश से तेल खरीदेगा, किस देश से नहीं, इसका फैसला भी अमेरिका कर रहा है। ये गलत है। गलत क्यों है, ये मैं बताता हूं। हकीकत ये है कि स्कॉट बेसेंट के ट्वीट से पहले ही भारत रूस से तेल की खरीद को बढ़ाने का फैसला कर चुका था।

रूस से भारत को कच्चे तेल की सप्लाई शुरू भी हो गई है। करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल एक हफ्ते में भारत पहुंच जाएगा। रूसी तेल के जिन दो तेल टैकरों को डायवर्ट करके भारत भेजा गया है, 14-14 लाख बैरल तेल से भरे इन टैंकर्स में एक ओडिशा का पारादीप पोर्ट पहुंच चुका है जबकि दूसरा गुजरात के वडीनार पोर्ट पर पहुंचने वाला है। इसके अलावा रूसी तेल लेकर सिंगापुर जा रहे एक और टैंकर को भी भारत की तरफ डायवर्ट किया गया है। रूस से अतिरिक्त कच्चा तेल भारत पहुंच गया है। इसके बाद स्कॉट बेसेंट जब ये दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन तक तेल खरीदने की छूट दी है, तो इस पर कौन यकीन करेगा? वैसे भी भारत पहले से ही अपनी ज़रूरत का करीब 20 प्रतिशत तेल रूस से आयात कर रहा है। आज भी हम रूस से रोज़ाना 10 लाख बैरल  से ज़्यादा तेल खरीद रहे हैं।

जब अमेरिका ने भारत पर टैरिफ लगाया था, उस वक्त भी रूस से तेल का आयात घटने की बजाए बढ़ा था। इस वक्त भी भारत में तेल और प्राकृतिक गैस का अच्छा खासा भंडार है। एक महीने तक किसी को चिन्ता करने की जरूरत नहीं है लेकिन अगर जंग लंबी खिंचती है तो तेल के आयात के दूसरे रास्ते खोजने होंगे। भारत सरकार इसी पर काम कर रही है।

भारत तेल और गैस के लिए सिर्फ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज़ पर निर्भर नहीं है। दूसरे रास्तों से तेल आ रहा है। सबसे संतोषप्रद हालत  इस वक्त LPG को लेकर है। LPG का स्टोरेज पर्याप्त है और प्रोडक्शन को लेकर भी कोई दिक्कत नहीं है। सरकार ने सभी रिफाइनरियों को LPG का उत्पादन बढ़ाने के आदेश जारी किए हैं। भारत में 33 करोड़ लोग LPG का इस्तेमाल करते हैं, ज़रूरत पड़ी तो जिस LPG का इस्तेमाल उद्योगों में हो रहा है, उसे रसोई घरों में खपत की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि भारत में अभी तेल और गैस की कोई कमी नहीं है  और लोगों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

उधर, विपक्षी दलों ने स्कॉट बेसेंट के ऐलान के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोल दिया, सरकार पर अमेरिका की जी-हुजूरी का आरोप लगाया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, जयराम रमेश से लेकर पवन खेड़ा तक सब बोले। राहुल गांधी ने कहा कि आज की कमजोर विदेश नीति एक Compromised प्रधानमंत्री की कमज़ोरी का नतीजा है। असदुद्दीन ओवैसी ने जुमे की नमाज के बाद अपनी  तकरीर में मोदी को कोसा। ओवैसी ने कहा, अमेरिका का एक मंत्री भारत को तेल खरीदने की इजाज़त दे रहा है और दूसरा मंत्री दिल्ली में आकर भारत को चिढ़ाता है, लेकिन 56 इंच सीने की बात करने वाली बीजेपी चुप है।

अमेरिका के बयानों को लेकर मोदी की आलोचना कोई पहली बार नहीं हो रही। जब ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान जंग रुकवाने की बात कही, जब ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ  लगाया, जब ट्रंप ने भारत को रूस से तेल की खरीद बंद करने के लिए कहा, हर बार मोदी की खामोशी पर सवाल उठे। लेकिन मोदी ने कभी ऐसी बातों की परवाह नहीं की। आखिरकार ट्रंप खुद-ब-खुद झूठे साबित हो गए।

जहां तक भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाज़त  का सवाल है, न किसी ने इजाज़त मांगी, न किसी ने इजाज़त दी। भारत पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, भारत आज भी रूस से तेल खरीदता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कोई मेहरबानी नहीं की। ये तो अपनी नाकामी छुपाने का तरीका है। ईरान के साथ जंग के कारण अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, यूरोप में तेल और गैस की सप्लाई बंद हो गई है, ट्रंप पर ज़बरदस्त दबाव है।

भारत दूसरे देशों से जो तेल खरीदता है, उसका बड़ा हिस्सा हमारी रिफायनरियों में प्रोसेस होने के बाद यूरोप भेजा जाता है। भारत ने इस मौके का फायदा उठाया, रूस से तेल का आयात बढ़ा दिया। इससे यूरोप के देशों की टेंशन थोड़ी कम होगी। इसीलिए ट्रंप ने ये दिखाने की कोशिश की कि दूसरे देशों की मुश्किलों को कम करने के लिए अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की 30 दिन की छूट दी है। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 06 मार्च, 2026 का पूरा एपिसोड

 

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement