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संस्कृत विद्वान रामभद्राचार्य और गीतकार गुलजार को ज्ञानपीठ पुरस्कार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1 Published : May 16, 2025 11:41 pm IST, Updated : May 16, 2025 11:52 pm IST

चित्रकूट में तुलसी पीठ के संस्थापक 75 वर्षीय रामभद्राचार्य प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक नेता, शिक्षाविद और चार महाकाव्यों समेत 240 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों के लेखक हैं।

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Image Source : PTI संस्कृत विद्वान रामभद्राचार्य को ज्ञानपीठ पुरस्कार

नई दिल्ली:राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान जगद्गुरु रामभद्राचार्य और मशहूर कवि-गीतकार गुलजार को 58वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। गुलजार के नाम से मशहूर सम्पूर्ण सिंह कालरा को हिंदी सिनेमा में उनके योगदान के लिए जाना जाता है और उन्हें इस दौर के बेहतरीन उर्दू शायरों में से एक माना जाता है। कवि-गीतकार गुलजार ‘स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं’ के कारण समारोह में शामिल नहीं हो सके। 

रामभद्राचार्य के ‘बहुआयामी योगदान’ की सराहना

चित्रकूट में तुलसी पीठ के संस्थापक 75 वर्षीय रामभद्राचार्य प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक नेता, शिक्षाविद और चार महाकाव्यों समेत 240 से अधिक पुस्तकों और ग्रंथों के लेखक हैं। संस्कृत विद्वान को पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र, नकद पुरस्कार और वाग्देवी सरस्वती की एक कांस्य प्रतिकृति प्रदान की गई। पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने संस्कृत साहित्य और समाज के लिए रामभद्राचार्य के ‘बहुआयामी योगदान’ की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘रामभद्राचार्य जी ने उत्कृष्टता के प्रेरक दृष्टांत प्रस्तुत किए हैं। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं और आपका योगदान बहुआयामी है। दृष्टि बाधित होने के बावजूद आपने अपनी दिव्य दृष्टि से साहित्य और समाज की असाधारण सेवा की है। आप एक सहज कवि हैं।’’ 

मुर्मू ने कहा, ‘‘आपके द्वारा लिखा गया संस्कृत साहित्य विपुल और उत्कृष्ट है। आप दिव्य भाषा संस्कृत के असाधारण उपासक हैं। भारतीय परंपराओं के सर्वश्रेष्ठ व्याख्याकारों में आपका विशेष स्थान है।’’ उन्होंने पाणिनि की ‘अष्टाध्यायी’ की व्याख्या के साथ-साथ ‘ब्रह्मसूत्र’, ‘भगवद गीता’ और प्रमुख उपनिषदों पर उनकी टिप्पणियों के लिए उनकी सराहना की। 

अस्वस्थता के कारण गुलजार समारोह में शामिल नहीं हो सके

राष्ट्रपति ने 90 वर्षीय गुलजार को भी बधाई दी और उनके पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन्हें शुभकामनाएं देती हूं कि वह शीघ्र ही पूर्ण स्वस्थ और सक्रिय हों तथा कला, साहित्य, समाज और देश के लिए अपना योगदान देते रहें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गुलजार साहब ने दशकों तक साहित्य सृजन के प्रति अपनी निष्ठा को जीवित रखा है। यह कहा जा सकता है कि गुलजार साहब एक ऐसे लेखक हैं जिन्होंने कठोरता के बीच कोमलता को स्थापित किया है। इन क्षेत्रों में सक्रिय लोगों को उनकी कला और साहित्य गतिविधियों से प्रेरणा और सीख लेनी चाहिए।’’ 

रामभद्राचार्य के प्रशस्ति पत्र में कहा गया है, ‘‘पांच वर्ष की आयु में उन्होंने भगवदगीता का गहन अध्ययन शुरू कर दिया और सात वर्ष की आयु में उन्होंने श्रद्धेय शिक्षकों के मार्गदर्शन में रामचरितमानस का अध्ययन शुरू कर दिया। भाषा की उनकी व्यापक समझ और संस्कृत में सभी परीक्षाओं में दक्षता से उन्हें विश्वविद्यालय की पढ़ाई में शीर्ष स्थान और स्वर्ण पदक मिला। इससे कई विद्वानों और शिक्षकों ने उनकी बुद्धि और रचनात्मक क्षमता को पहचाना।’ पद्य, कविता, पत्र, गद्य, छंद रचनाओं, संस्कृत साहित्यिक कृतियों के लेखक रामभद्राचार्य को अन्य सम्मानों के अलावा 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है। 

उर्दू शायरी में गुलज़ार एक नयी शैली लेकर आए

गुलजार के प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि उर्दू शायरी में गुलज़ार एक नयी शैली लेकर आए। गुलजार के लोकप्रिय गीतों में फिल्म ‘आनंद’ का ‘मैंने तेरे लिए’, फिल्म ‘मौसम’ का ‘दिल ढूंढता है’, फिल्म ‘दिल से’ का ‘छैंया छैंया’ शामिल हैं। ‘रावी पार’ पुस्तक के लेखक गुलजार को सात बार राष्ट्रीय पुरस्कार और 21 बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिले हैं। रामभद्राचार्य और गुलजार को 2023 के लिए इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल को 2024 के लिए 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार का विजेता घोषित किया गया है। 

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