नई दिल्ली: संस्कृत एक प्राचीन भाषा है, जिसे देवताओं की भाषा भी कहा जाता है। भारत में इस भाषा का महत्व बहुत ज्यादा है क्योंकि वैदिक काल में जो भी महान रचनाएं हुईं, वह इसी भाषा में की जाती थीं। वेदों, उपनिषदों और पुराणों में इसी भाषा में ज्ञान दिया गया है। रामायण और महाभारत में भी इसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। माना जाता है कि आर्यों की भाषा भी संस्कृत ही थी।
आज यानी 9 अगस्त को विश्व संस्कृत दिवस मनाया जा रहा है। इसे हर साल श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण माह में पूर्णिमा का दिन होता है। पहला विश्व संस्कृत दिवस साल 1969 में मनाया गया था। इस दिन को संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए और लोगों को इस भाषा के प्रति जागरुक करने के लिए मनाया जाता है, जिससे दुनिया को ये याद रहे कि इस भाषा का महत्व कितना ज्यादा है।
संस्कृत भाषा के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि ये भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक है। इसे तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और ओडिया के साथ भारत की 6 शास्त्रीय भाषाओं में से एक माना जाता है।
संस्कृत भाषा का प्राचीन काल से ही इतना प्रचार-प्रसार हुआ है कि वह दुनिया के तमाम देशों में पहुंच चुकी है। विश्व के कई देशों में इसे पढ़ाया जाता है और इसे पढ़ने वालों की दिलचस्पी इसमें बनी हुई है। ये उन देशों में विशेष रूप से पढ़ाई जाती है, जहां दक्षिण एशियाई अध्ययन, इंडोलॉजी, भाषा विज्ञान, या हिंदू और बौद्ध धर्म से संबंधित शैक्षिक कार्यक्रम हैं।
संस्कृत भाषा विशेष रूप से जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, नेपाल, दक्षिण-पूर्व एशिया, जापान, चीन, भूटान, इजरायल, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, नॉर्वे, रूस, स्वीडन, और स्विट्जरलैंड में पढ़ाई जाती है।
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