1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. हेल्थ
  4. सावधान! शहरों में रह रहें लोगों के हड्डियों में हो रही है ये गंभीर बीमारी, आप भी तुरंत कराएं चेकअप

सावधान! शहरों में रह रहें लोगों के हड्डियों में हो रही है ये गंभीर बीमारी, आप भी तुरंत कराएं चेकअप

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Mar 30, 2018 01:24 pm IST,  Updated : Mar 30, 2018 03:33 pm IST

देश की राजधानी दिल्ली में किए गए एक अध्ययन में नौ प्रतिशत लोग हड्डियों की 'खामोश बीमारी' के नाम से कुख्यात ऑस्टियोपोरोसिस से और 60 प्रतिशत लोग ओस्टियोपोरोसिस की पूर्व स्थिति ऑस्टियोपेनिया से पीड़ित पाए गए।

bone pain- India TV Hindi
bone pain

हेल्थ डेस्क: देश की राजधानी दिल्ली में किए गए एक अध्ययन में नौ प्रतिशत लोग हड्डियों की 'खामोश बीमारी' के नाम से कुख्यात ऑस्टियोपोरोसिस से और 60 प्रतिशत लोग ओस्टियोपोरोसिस की पूर्व स्थिति ऑस्टियोपेनिया से पीड़ित पाए गए। नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के आथोर्पेडिक विभाग की ओर से आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एसीएफ) के सहयोग से किए गए इस अध्ययन की रिपोर्ट इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईजेएमआर) के नवीनतम मार्च (2018) संस्करण में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में शहरी इलाके के लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रैक्चर के जोखिम को लेकर देश की राजधानी में किये गए एक अध्ययन में पाया गया कि शहरों में रहने वाले लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस की दर अधिक है। 

आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन (एसीएफ) के सहयोग से इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के आथोर्पेडिक विभाग की ओर से 38 से 68 साल के पुरुषों और महिलाओं पर किये इस अध्ययन से पता चला है कि करीब 9 प्रतिशत लोग ऑस्टियोपोरोसिस से और 60 प्रतिशत लोग ऑस्टियोपेनिया से पीड़ित हैं।ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों की बीमारी है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां इतनी कमजोर और भंगुर हो जाती हैं कि गिरने से झुकने या छींकने-खांसने पर भी हड्डियों में फ्रैक्चर हो सकता है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाले फ्रैक्च र सबसे अधिक कुल्हे कलाई या रीढ़ की हड्डी में सबसे ज्यादा होते हैं। 

ऑस्टियोपोरोसिस को 'खामोश बीमारी' भी कहा जाता है, क्योंकि इस बीमारी में जब तक फ्रैक्च र नहीं होता है तब तक इसका पता नहीं चलता है। ऑस्टियोपोरोसिस के कारण दुनियाभर में हर साल लगभग 90 लाख फ्रैक्च र होते हैं। ओस्टियोपोरोसिस की पूर्व स्थिति को ऑस्टियोपेनिया कहा जाता है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती हैं लेकिन यह ऑस्टियोपोरोसिस जितनी गंभीर नहीं होती है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से प्रकाशित होने वाले आईजेएमआर के नवीनतम मार्च (2018) संस्करण में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार, यह सर्वेक्षण नई दिल्ली में सुखदेव विहार, सरिता विहार, कालकाजी, ईस्ट ऑफ कैलाश और मयूर विहार जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच किया गया। 

यह सर्वेक्षण नई दिल्ली स्थित संगठन आर्थराइटिस केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली के वरिष्ठ आथोर्पेडिक सर्जन डॉ. (प्रोफेसर) राजू वैश्य के मार्गदर्शन में डॉ. विपुल विजयए डॉ. अमित के. अग्रवाल और डॉ. प्रशांत माहेश्वरी ने किया। डॉ. राजू वैश्य के अनुसार, इस अध्ययन में शहरी आबादी में ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बहुत अधिक पाए गए।

इस मौजूदा अध्ययन में सेक्स, माता-पिता में फ्रैक्च र का इतिहास और सेकंडरी ऑस्टियोपोरोसिस में महत्वपूर्ण संबंध पाया गया जबकि अल्कोहल और स्टेरॉयड सेवन का कम टी-स्कोर के साथ काफी महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया। डॉ. राजू वैश्य ने कहा कि हड्डियों के घनत्व के कम होने के कारण भविष्य में हड्डियां कमजोर और भंगुर हो जाती हैं और बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के कारण भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका गंभीर सामाजिक-आर्थिक दबाव भी पड़ सकता है। इस अध्ययन में, शहरी भारतीय आबादी में ऑस्टियोपेनिया और ऑस्टियोपोरोसिस के मामले बहुत अधिक पाए गए।

इस अध्ययन के तहत एक गैर-सरकारी संस्था की सहायता से कम्युनिटी आउटरीच प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस अध्ययन के लिए मध्य और पूर्वी दिल्ली में कुल चौदह शिविर आयोजित किए गए और शिविर में आने वाले हर तीसरे व्यक्ति को इस अध्ययन में शामिल किया गया। इस अध्ययन में सुखदेव विहार, ईश्वर नगर, सरिता विहार, जसोला, कालकाजी, ईस्ट ऑफ कैलाश, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, महारानी बाग, लाजपत नगर, निजामुद्दीन और मयूर विहार को शामिल किया गया। इस अध्ययन में शामिल अधिकतर लोग मध्यम और उच्च वर्ग के थे।

Latest Health News

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Health से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल