श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाने का विधान है | लिहाजा शनिवार को नागपंचमी है | आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार वास्तु के अनुसार सही दिशा में, सही क्रम में पूजा करके कालसर्प दोष से मुक्ति पा सकते हैं। जानिए इसके बारे में विस्तार से।
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार प्रत्येक जन्म पत्रिका में राहु से केतु सातवें खाने में होता है और काल सर्प दोष का मतलब है सारे ग्रहों का राहु और केतु के एक ही तरफ होना। अतः आपकी जन्मपत्रिका में ऐसी स्थिति बन रही है तो आपको आज के दिन नागपंचमी की पूजा जरूर करनी चाहिए, लेकिन यहां आपको एक और बात जरूर बता दें कि अगर आपकी पत्रिका में कालसर्प दोष नहीं है, तब भी आपको आज के दिन दिशाओं के क्रम में नागों की पूजा जरूर करनी चाहिए। क्योंकि राहु तो सभी की जन्मपत्रिका में होता है। अतः कालसर्प दोष हो या न हो, राहु कृत पीड़ा की शान्ति के लिये दिशाओं के सही क्रम में पूजा करना सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा।
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राहु सर्प का मुख है और केतु सर्प की पूंछ है चूंकि पूजन मुख में करना उचित है। अतः आपको ये देखना है कि आपकी जन्म पत्रिका के किस खाने में राहु बैठा हुआ है और फिर उसी के अनुसार सही दिशा में नाग पंचमी की पूजा करनी है | फिलहाल राहु आपकी कुंडली के किस खाने में बैठा हुआ है।
अगर आपको भी इस तरह का कोई भय है या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है या आप राहू से पीड़ित हैं, तो उससे छुटकारा पाने के लिये आज के दिन आपको इन आठ नागों की पूजा करनी चाहिए...... वासुकि .... तक्षक .... कालिय .... मणिभद्र ..... ऐरावत ..... धृतराष्ट्र .... कर्कोटक और धनंजय |
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