इंदौर में जहरीले पानी से 16 लोगों की मौत के बाद बड़े प्रशासनिक फेरबदल किए जा रहे हैं। अब इंदौर नगर निगम में बड़ा बदलाव किया गया है। क्षितिज सिंघल को दिल्ली यादव की जगह नया निगम आयुक्त बनाया गया है। 2014 बैच के आईएस अधिकारी क्षितिज सिंघल को दो दिन पहले भागीरथपुरा की घटना के चलते हटाए गए दिलीप यादव की जगह निगम आयुक्त बनाया गया है। क्षितिज सिंगल इससे पहले मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में प्रबंध संचालक थे।
आधिकारिक तौर पर प्रशासन ने माना है कि दूषित पानी की सप्लाई के कारण छह लोगों की मौत हुई है। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि गंदे पानी के कारण 16 मौतें हुई हैं, जिनमें एक छह महीने का बच्चा भी शामिल है।
सही पानी की सप्लाई प्राथमिकता- क्षितिज
इंदौर नगर निगम आयुक्त का पद संभालने के बाद क्षितिज सिंघल ने कहा, "हम पानी की सप्लाई की चुनौतियों को देख रहे हैं। जैसा कि मैंने कहा, मैंने अभी-अभी जॉइन किया है, इसलिए मेरा लक्ष्य इलाके का दौरा करना और यह देखना है कि हमारी तरफ से क्या किया जा सकता है, हम उस पर काम कर रहे हैं। जो टीमें काम कर रही हैं, वे लगातार जिला प्रशासन के संपर्क में हैं... हमारी सबसे पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को अच्छा और सही गुणवत्ता का पानी मिले।"
बीमारियों की रोकथाम के लिए ‘रिंग सर्वेक्षण’ शुरू
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त के प्रकोप की प्रभावी रोकथाम और मरीजों की शीघ्र पहचान के लिए शनिवार से 'रिंग सर्वेक्षण' शुरू किया गया और इस कवायद को अंजाम दे रहे दल 5,000 से ज्यादा घरों में पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि ‘रिंग सर्वेक्षण’, किसी बीमारी के प्रकोप के स्रोत, स्वरूप और प्रसार को समझने की विशिष्ट विधि है, जिसमें मरीज के आस-पास के लोगों का अध्ययन किया जाता है ताकि रोग के कारण और इसकी प्रभावी रोकथाम के उपाय खोजे जा सकें। अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में इस सर्वेक्षण के दौरान हर ‘हॉटस्पॉट’ (जिन घरों में उल्टी-दस्त के ज्यादा मरीज मिले हैं) के आस-पास के 50 घरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस सर्वेक्षण को 16 दल अंजाम दे रहे हैं जिनमें चिकित्सा अधिकारियों और नर्सिंग अधिकारियों के साथ ही आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठनों के स्वयंसेवक शामिल हैं।
149 लोग अस्पताल में भर्ती
शनिवार को भागीरथपुरा के 5,079 घरों के सर्वेक्षण के दौरान 25,395 लोगों की जांच में उल्टी-दस्त के हल्के लक्षणों वाले 65 मरीज मिले जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्होंने बताया कि 15 अन्य मरीजों को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में भेजा गया। अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त के प्रकोप के बाद अब तक अस्पतालों में कुल 354 मरीजों को भर्ती किया गया है जिनमें से 205 लोगों को स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल 149 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 20 लोग गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं। प्रशासन ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल त्रासदी में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा था कि उन्हें इस प्रकोप में 10 मरीजों की मौत की जानकारी मिली है।
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