मुंबई: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में BMC चुनाव से पहले सियासी पारा गरम हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर बीजेपी कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि BMC में बीजेपी का झंडा लहराना ही अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। नाम लिए बिना उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन पर हमला बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान घोटाले करने वाले लोग मुंबईवासियों का भला कभी नहीं कर सकते। उन्होंने बीजेपी को मुंबई की जनता की मुश्किलें कम करने वाली पार्टी बताया और कहा कि मुंबई में पार्टी का मुकाबला जिहादी मानसिकता वाले लोगों से है।
फडणवीस ने आगे कहा, 'जो शुरुआत अटल जी ने की थी, वैसे ही BMC चुनाव में अपनी सत्ता लाकर अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा, ये दिखाना है। हम किसी को मेयर बनाने के लिए यह लड़ाई नहीं लड़ रहे। कोई मेयर बने या न बने, फर्क नहीं पड़ता। हमारी लड़ाई मुंबईकरों की लड़ाई है। जिस तरीके से मुंबईकरों को भ्रष्टाचार के दलदल में धकेला गया, जब मुंबईकर मर रहे थे तब अपनी हथेली पर रखकर घी खाने वाले कौन थे, ये हमें मुंबईकरों को बताना है। मुंबई में जिस तरह आज हमारी राष्ट्रवादी शक्तियां हैं, इन शक्तियों के खिलाफ जिहादी मानसिकता तैयार हो रही है। उस मानसिकता को कुचलने के लिए हम चुनाव में उतरे हैं।'
फडणवीस के इस बयान पर शिवसेना (UBT) के नेता सचिन अहीर ने तीखा पलटवार किया। अहीर ने कहा, 'फडणवीस का राष्ट्रवाद झूठा है। उन्हें राष्ट्रवाद और हिंदुत्व तभी याद आता है जब चुनाव नजदीक होते हैं। उनका बयान हिंदुओं में फूट डालने वाला है। उद्धव ठाकरे को जिहादी कहने से पहले फडणवीस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए।' विश्लेषकों का मानना है कि फडणवीस ने सोच-समझकर उद्धव को निशाना बनाया। विधानसभा चुनाव में महायुति ने यह नैरेटिव सफलतापूर्वक बनाया था कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व छोड़ दिया है, लेकिन अब राज ठाकरे और उद्धव के गठबंधन से हिंदू वोट बंट सकते हैं। यही वजह है कि फडणवीस ने 'जिहादी मानसिकता' का तीर छोड़ा।
वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने फडणवीस के बयान का समर्थन किया। पार्टी नेता संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव और राज ठाकरे दोनों हिंदू विरोधी हैं। उन्होंने कहा, 'उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी में हिंदू विरोधी मुसलमानों और पाकिस्तान परस्त लोगों को जगह देते हैं, जबकि राज ठाकरे उत्तर भारतीय हिंदुओं को निशाना बनाते हैं। यही जिहादी मानसिकता है।' वहीं, MVA के बिखरने के बाद अलग चुनाव लड़ रही कांग्रेस ने फडणवीस के बयान में अपना जिक्र न होने की वजह से चुप्पी साध ली, और विजय वडेट्टीवार ने कहा कि जब फडणवीस ने कांग्रेस के बारे में कुछ नहीं कहा तो हम जवाब क्यों दें, शिवसेना और MNS इसका जवाब दें। हालांकि बाद में संभलते हुए वडेट्टीवार ने कहा कि फडणवीस संवैधानिक पद पर हैं, उन्हें इस तरह के नफरती बयान नहीं देने चाहिए।
उद्धव ठाकरे के लिए BMC चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन गठबंधन में शामिल राज ठाकरे की पार्टी MNS के नेताओं के बयान उनकी मुश्किल बढ़ा रहे हैं। MNS नेता संदीप देशपांडे ने उत्तर भारतीयों को धमकाते हुए ट्वीट किया कि अगर मराठी का अपमान किया तो 'नहीं बंटोगे तो भी पिटोगे'। यह ट्वीट शिवसेना भवन के बाहर लगे पोस्टर 'उत्तर भारतीय बंटोगे तो पिटोगे' के जवाब में था। शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इसका बचाव करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे से उद्धव ठाकरे तक मुंबई के उत्तर भारतीयों के साथ रहे हैं और उन्हें पूरा सम्मान दिया है, इसलिए उत्तर भारतीयों को भी मराठी भाषा और मराठी मानुस का सम्मान करना चाहिए। संदीप देशपांडे के ट्वीट का यही मतलब था, इसमें कुछ गलत नहीं है।
हालांकि, बीजेपी, शिंदे शिवसेना और कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया। कांग्रेस नेता नसीम खान ने कहा कि MNS के इसी तरह के नफरती बयानों और कामों की वजह से कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे से दूरी बनाई। शिंदे गुट के प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा, 'राज ठाकरे की वजह से उत्तर भारतीय अब उद्धव ठाकरे से भी दूर हो जाएंगे। उद्धव और राज को समझ लेना चाहिए कि महाराष्ट्र में महायुति की सरकार है। कोई उत्तर भारतीयों को धमकाएगा या मारपीट करेगा तो बख्शा नहीं जाएगा।' राज ठाकरे और उद्धव के साथ आने से महायुति को थोड़ी परेशानी जरूर होगी। राज ठाकरे की इमेज सिर्फ उत्तर भारतीय विरोधी नहीं है, बल्कि उनकी पार्टी उत्तर भारतीयों के अपमान और मारपीट के लिए जानी जाती है। दूसरी तरफ बालासाहेब की शिवसेना कट्टर हिंदुत्ववादी रही है।
वहीं, स्थानीय निकाय चुनावों में शरद पवार अलग रणनीति अपना रहे हैं। वे अजीत पवार गुट के साथ गठबंधन की तैयारी में हैं। पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ महानगरपालिका चुनाव के लिए दोनों गुटों के बीच सीट बंटवारे पर बात हुई। शरद पवार गुट ने 40-45 सीटें मांगी हैं, जबकि अजीत गुट 30 देने को तैयार है। अंतिम फैसला सुप्रिया सुले और अजीत पवार मिलकर लेंगे। मुंबई को लेकर अजीत गुट ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। सुप्रिया सुले ने इशारों में गठबंधन की पुष्टि करते हुए कहा, 'अजीत पवार भले महायुति में हों, लेकिन उन्होंने अपनी विचारधारा नहीं बदली। वे हर भाषण में शाहू, फुले, अंबेडकर और वाईबी चव्हाण की बात करते हैं। दोनों पार्टियों का गठबंधन स्वाभाविक है।' माना जा रहा है कि अगर दोनों में गठबंधन होता है तो पुणे में उनके लिए अच्छी संभावनाएं होंगी।
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