Tuesday, February 10, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. राजस्थान
  3. महिलाओं के लिए स्मार्टफोन बैन करने के प्रस्ताव पर चौधरी समाज का यू-टर्न, कहा– 'यह केवल सुझाव था, कोई निर्णय नहीं'

महिलाओं के लिए स्मार्टफोन बैन करने के प्रस्ताव पर चौधरी समाज का यू-टर्न, कहा– 'यह केवल सुझाव था, कोई निर्णय नहीं'

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
Published : Dec 25, 2025 12:04 pm IST, Updated : Dec 25, 2025 12:14 pm IST

जालोर में महिलाओं के लिए स्मार्टफोन इस्तेमाल पर पाबंदी अब नहीं रहेगी। चौधरी समाज ने कहा है कि पंचों ने केवल सुझाव दिया था। न कि फैसला लागू किया गया था।

चौधरी समाज के पंच- India TV Hindi
Image Source : REPORTER चौधरी समाज के पंच

जालोरः राजस्थान के जालोर जिले में  महिलाओं के स्मार्टफोन बैन करने के प्रस्ताव पर चौधरी समाज ने यू-टर्न ले लिया है। समाज के पंचो ने स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रस्ताव को वापस ले लिया है और कहा है कि यह कोई अंतिम निर्णय नहीं बल्कि महिलाओं की ओर से आए सुझाव को समाज के समक्ष चर्चा के लिए रखा गया था, लेकिन अब इसे पूरी तरह वापस ले लिया गया है।

15 गांवों में महिलाओं के लिए स्मार्टफोन हो गया था बैन

जालोर जिले में इन दिनों सुंधा पट्टी के 15 गांवों में महिलाओं के स्मार्टफोन बैन करने को लेकर समाज की बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया था। वीडियो सामने आने के बाद समाज और प्रशासन स्तर पर भी इस पर सवाल उठने लगे। मामले की पड़ताल के दौरान समाज के पंचों से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो में किसी भी प्रकार का अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, बल्कि समाज की महिलाओं द्वारा बच्चों पर मोबाइल के दुष्प्रभाव को लेकर दिया गया सुझाव समाज के समक्ष चर्चा के लिए रखा गया था।

समाज के पंचों ने साफ की स्थिति

पंचों का कहना है कि महिलाओं के पास स्मार्टफोन होने से बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। बच्चे दिनभर मोबाइल पर गेम खेलते रहते हैं, पढ़ाई से दूर हो रहे हैं, साथ ही साइबर ठगी और सोशल मीडिया पर आने वाले अश्लील विज्ञापनों से भी बच्चों की मानसिकता प्रभावित हो रही है। इसी को लेकर महिलाओं ने बुजुर्गों के सामने यह सुझाव रखा था कि इस विषय पर समाज में विचार किया जाए और सभी की राय ली जाए। समाज के स्तर पर 26 जनवरी 2026 तक सुझाव मांगकर आगे निर्णय लेने की बात कही गई थी।

समाज के प्रतिनिधि सुजानाराम ने दी ये जानकारी

समाज के प्रतिनिधि सुजानाराम ने बताया कि रविवार को हुई बैठक में केवल सुझाव रखा गया था, कोई निर्णय नहीं लिया गया और न ही इसे लागू किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पढ़ाई करने वाली बच्चियों को मोबाइल रखने से रोका नहीं गया था और शिक्षा के लिए मोबाइल के उपयोग पर कोई प्रतिबंध का प्रस्ताव नहीं था। बच्चों द्वारा मोबाइल के अत्यधिक उपयोग से आंखों, स्वास्थ्य और व्यवहार पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर यह विषय उठाया गया था।

महिलाओं ने भी बताया कि बच्चों के दिनभर मोबाइल और वीडियो गेम में लगे रहने से उनकी पढ़ाई, स्वास्थ्य और दिनचर्या प्रभावित हो रही है, इसी कारण यह सुझाव बुजुर्गों के सामने रखा गया था। हालांकि अब समाज में उत्पन्न भ्रम और विवाद को देखते हुए पांचों पटेलनों ने बैठक कर इस पूरे प्रस्ताव को वापस ले लिया है और स्पष्ट किया है कि यह केवल समाज हित में रखा गया सुझाव था, कोई निर्णय नहीं था। 

रिपोर्ट- हीरालाल

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। राजस्थान से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement