Monday, February 09, 2026
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ममता बनर्जी की कोशिश नाकाम, SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला; बंगाल में बढ़ी वोटर लिस्ट की डेडलाइन

देश के कई राज्यों में SIR को लेकर चल रही विवादित परिस्थितियों के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में वकील बनकर हस्तक्षेप करने की कोशिश की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उन्हें करारा झटका दिया।

Reported By : Gonika Arora, Atul Bhatia, Onkar Sarkar Edited By : Malaika Imam Published : Feb 09, 2026 05:17 pm IST, Updated : Feb 09, 2026 05:40 pm IST
ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका- India TV Hindi
Image Source : PTI ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी घमासान के बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से दोहरी निराशा हाथ लगी है। एक ओर जहां खुद वकील बनकर पैरवी करने की उनकी कोशिश नाकाम रही, वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग (ECI) के अधिकारियों के खिलाफ हो रही हिंसा और धमकियों पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

"प्रक्रिया में बाधा बर्दाश्त नहीं"

चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि SIR की प्रक्रिया पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत ने साफ कहा कि इस प्रक्रिया में कोई भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शीर्ष अदालत ने राज्यों को चेतावनी दी कि इस जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में राज्यों को अपनी ओर से किसी भी तरह की दखलअंदाजी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

चुनाव आयोग के अफसरों पर हमला

वहीं, सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) और अन्य वकीलों ने कोर्ट को बताया कि बंगाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों को डराया जा रहा है और उनके खिलाफ हिंसा हो रही है। इस पर कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाते हुए बंगाल के DGP को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। उन्हें चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए आरोपों और सुरक्षा में चूक पर स्पष्टीकरण देना होगा।

याचिकाकर्ताओं (नायडू और गिरी) ने कोर्ट को बताया कि सड़कों पर हिंसा हो रही है और पुलिस FIR तक दर्ज नहीं कर रही है। यहां तक कि मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) तक को नहीं बख्शा गया। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने स्पष्ट कहा, "प्रक्रिया में कोई भी बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"

वोटर लिस्ट की समय सीमा बढ़ी

वहीं, बंगाल में दस्तावेजों की जांच और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के लिए 14 फरवरी की समय सीमा को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि सूची में शामिल सभी 8505 ग्रुप-बी अधिकारी कल शाम 5 बजे तक अपनी ड्यूटी के लिए रिपोर्ट करें। चुनाव आयोग के पास यह अधिकार होगा कि वह मौजूदा ERO/AERO को बदल सके या योग्य पाए जाने पर उनकी सेवाएं जारी रख सके।

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