प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत रखा जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है इसलिए शिव जी की कृपा से व्यक्ति को मानसिक शांति की प्राप्ति भी होती है। आइए ऐसे में जानते हैं कि मई महीने में दूसरा मासिक प्रदोष व्रत किस दिन रखा जाएगा और इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
मासिक प्रदोष व्रत मई 2024- शुभ पूजा मुहूर्त
मई के महीने में वैशाख मास का पहला प्रदोष व्रत 5 मई को था, यह व्रत कृष्ण पक्ष में था। वहीं इस महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 20 मई 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 9 मिनट से 9 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही शाम के समय भी इस दिन शिव आराधना की जा सकती है। इस दिन शिव जी की पूजा के साथ ही योग-ध्यान करने से भी आपको लाभ की प्राप्ति होती है। इस दिन ध्यान करके आप आध्यात्मिक बल पा सकते हैं। आइए अब जानते हैं कि इस दिन आपको कैसे भगवान शिव की पूजा-आराधना करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा से पहले आपको पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए और खुद भी स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके उपरांत आपको भगवान शिव का ध्यान करते हुए धूप-दीपक जलाना चाहिए और शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए। इस दिन पूजा के दौरान भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि आप अर्पित कर सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जप और शिव स्तोत्र का पाठ आप कर सकते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद आपको भगवान शिव को भोग लगाना चाहिए और अंत में घर के अन्य लोगों में प्रसाद बांटना चाहिए।
भगवान शिव को इन मंत्रों के जप से करें प्रसन्न
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगवान शिव के इन मंत्रों का जप आप दिन में कभी भी कर सकते हैं। हालांकि मंत्र जप के लिए आपको एकांत जगह का चुनाव करना चाहिए। माना जाता है कि जो लोग प्रदोष व्रत के दिन शिवमंत्रों का जप करते हैं उनके शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं। भगवान शिव की कृपा ऐसे भक्तों पर बरसती है और जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही प्रदोष व्रत के शुभ प्रभाव से वैवाहिक जीवन में भी संतुलन आता है और अगर संतान प्राप्ति के लिए इस दिन व्रत रखा जाए तो मनोकामना पूरी होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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