अगर आप सुबह सुबह उठने के बाद सोचते हैं कि सुबह सबसे पहले क्या किया जाए जिससे आपका पूरा दिन अच्छा जाए। तो चलिए हम आपकी दुविधा दूर कर देते हैं। सुबह को शुभ बनाने के लिए कई उपाय बताए गए हैं, इन्हीं में से एक उपाय है मंत्रोच्चार। मान्यताओं के अनुसार मंत्रों में बहुत ताकत होती है। इसलिए हिन्दू धर्म में सुबह सुबह मंत्र पढ़ना शुभ बताया गया है। सुबह उठने के तुरंत बाद अगर आप इन मंत्रों का उच्चारण करते हैं तो इससे आपकी सभी समस्याएं खत्म हो जाती है। इन मंत्रों का रोजाना सुबह उठने के बाद जाप करने से आपको सफलता मिलेगी। मंत्र न सिर्फ मानसिक शांति देते हैं बल्कि इंद्रियों पर काबू पाने की क्षमता में भी वृद्धि करते हैं। इसलिए सवेरे आंख खुलते ही इन कुछ खास मंत्रों का उच्चारण करें। चलिए हम आपको बताते हैं वे मंत्र कौन से हैं।
कराग्रे वसति लक्ष्मी: कर मध्ये सरस्वती।
कर मूले तू गोविंदा, प्रभाते कर दर्शनम।
अर्थ: रोजाना सुबह आंखें खोलते ही सबसे पहले हथेलियों के दर्शन कर इस मंत्र का जाप करें। हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में श्री सरस्वती एवं हाथों के मूल में गोविंद का वास होता है। इससे मां लक्ष्मी के साथ देवी सरस्वती और ब्रह्मा जी का आशीर्वाद प्रदान करता है।
समुद्रवसने देवि पर्वतस्तनमंडले,
विष्णुपत्नि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व में
अर्थ: जमीन प्रतिदिन छोटे-बड़े बोझ का भार झेलती है। भूमि से ही मनुष्य को अनाज, पानी जैसी अनेक वस्तुएं मिलती हैं। सवेरे उठकर इस मंत्र का जाप करते हुए भूमिवंदन करें। इससे अन्न, धन की कमी नहीं होती।
सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:
मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यतिं न संशय:
अर्थ : इसका अर्थ है मनुष्य माता के प्रसाद से सभी बाधाओं से मुक्त होगा और धन, धान्य एवं संतान से सम्पन्न होगा इसमें कोई संदेह नहीं है।
सर्वमंगल मांगल्यै शिव सवार्थ साधिक,
शरण्ये त्रयम्बके गौरि नरायणि नमोस्तु ते
अर्थ :ये मंत्र शक्ति की यानी देवी माँ दुर्गा को समर्पित है। इस मंत्र का जाप करने से जीवन मे व्यक्ति बहुत आगे बढ़ता है। इसका अर्थ है, ''मां गौरी सबकी मंगल और कल्याण करेंगी। वो जीवन की उद्धारकर्ता है। उनकी शरण मे आने से सब की इच्छा पूरी हो जाती है।वो तीनो लोक को जानने वाली है,वो भगवान शिव की अर्धांगिनी और नारायण की अर्धांगिनी है। अर्थात देवों के देव महादेव के सभी स्वरूपों मे वो ही हैं।
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