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सावन के दूसरे सोमवार के दिन भोलेनाथ को न चढ़ाएं ये चीजें, नाराज हो जाएंगे शिवशंकर

सावन का दूसरा सोमवार बेहद खास है, ऐसे में इस दिन शिवभक्तों को अपने आराध्य को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय चीजों का चढ़ावा चढ़ाना चाहिए। लेकिन भूल से भी कुछ चीजों को इसमें शामिल नहीं करना चाहिए...

Edited By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour
Published : Jul 20, 2025 12:38 pm IST, Updated : Jul 20, 2025 12:38 pm IST
शिवलिंग- India TV Hindi
Image Source : SORA AI भगवान शिव

सावन में भोलेनाथ की पूजा बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है। लोग रोजाना शिव को जलाभिषेक कर रहे हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों में भोलेनाथ को प्रसन्न करना अन्य देवों की तुलना में ज्यादा सरल बताया गया है। माना जाता है कि भोलेनाथ को अगर एक लोटा जल भी अर्पित करते हैं तो भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। पर पूजा के दौरान कुछ चीजों को विशेष ध्यान रखना होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि भोलेनाथ की पूजा में किन चीजों का इस्तेमाल करना वर्जित है...

केतकी के पुष्प

सावन में भोलेनाथ की पूजा के दौरान केतकी का पुष्प नहीं चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि एक बार ब्रह्म देव और केतकी के पुष्प ने मिलकर भगवान शिव के झूठ बोला था कि उन्होंने शिवलिंग का अंत देख लिया। इसे झूठ से नाराज होकर भगवान शिव ने केतकी को श्राप दिया कि उसका पुष्प कभी भी पूजा में शामिल नहीं किया जाएगा। तभी से शिव पूजा में केतकी के पुष्प वर्जित हैं।

तुलसी

एक तरफ देवी-देवताओं की पूजा में तुलसी को अधिक महत्व दिया जाता है लेकिन शिव जी की पूजा में तुलसी के पौधे वर्जित हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, जब शिव जी ने अपने राक्षसी अंश जलंधर का वध किया तब उसकी पत्नी तुलसी ने भोलेनाथ को श्राप दिया कि वह कभी भी शामिल नहीं की जाएंगी। इसी कारण तुलसी के पत्ते शिव पूजा में शामिल नहीं होते।

कुमकुम, रोली और सिंदूर

कुमकुम, रोली और सिंदूर इन तीनों के स्त्री तत्व से जुड़ा माना गया है, ऐसे में ये अन्य देवी-देवताओं की पूजा के दौरान उपयोग किए जाते हैं। पर शिवलिंग को पुरुष तत्व माना जाता है, ऐसे में इन्हें भगवान शिव की पूजा में शामिल नहीं किया जाता। मान्यता है कि अगर शिव को यह चढ़ाया गया तो पूजन की ऊर्जाओं का संतुलन बिगड़ जाएगा।

नारियल

शिवलिंग पर नारियल या उसका पानी कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। इसके बजाए सिर्फ जल, दूध और गन्ने के रस से शिव का अभिषेक करना चाहिए।

टूटे चावल

भगवान शिव की पूजा में चावल को शामिल किए जाने का प्रावधान है, क्योंकि चावल को अक्षत भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह कभी नष्ट नहीं होता यानी अविनाशी जो भोलेनाथ के भी नाम है, इसीलिए भूलकर भी चावल के टूटे दानों को शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए। इससे भगवान शंकर नाराज हो सकते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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