Amalaki Ekadashi 2026 Live: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी या आंवला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भी भक्त आमलकी एकादशी का व्रत रखता है उसे सौ गौ दान के बराबर फल प्राप्त होता है। मान्यता है इस एकादशी पर भगवान विष्णु आंवला के पेड़ में निवास करते हैं इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। चलिए आपको बताते हैं आमलकी एकादशी की पूजा विधि, मुहूर्त और व्रत कथा।
आमलकी एकादशी व्रत कथा (Amalaki Ekadashi Vrat Katha)
आमलकी एकादशी की कथा अनुसार प्राचीन काल में वैदिक नाम का एक नगर था। जहां ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र रहा करते थे। इस नगर के सभी लोग भगवान विष्णु के परम भक्त थे और उनकी पूजा में सदैव लीन रहते थे। इस नगर के राजा चैतरथ विद्वान और धर्मपरायण थे। इस नगर में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सभी एकादशी तिथियों का व्रत किया करता था। जब फाल्गुन माह की आमलकी एकादशी आई, तो राजा समेत नगर के सभी वासियों ने व्रत रखा। सभी ने मंदिर जाकर आंवले के वृक्ष की पूजा-अर्चना की और वहां रात्रि भर जागरण भी किया।
लेकिन उसी रात एक पापी बहेलिया मंदिर में जा पहुंचा जो भूख-प्यास से व्याकुल था और भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। वो मंदिर के एक कोने में शांति से बैठकर जागरण को देखने लगा। साथ ही सच्चे मन से विष्णु भगवान और एकादशी के महत्व की कथा सुनने लगा। इस तरह से उसकी पूरी रात बीत गई। जब सुबह हुई तो सभी नगरवासी अपने-अपने घर को चले गए और बहेलिया ने भी अपने घर जाकर भोजन किया। लेकिन कुछ समय बाद बहेलिया की मृत्यु हो गई।
बहेलिया के रूप में उसने न सिर्फ़ आमलकी एकादशी की कथा सुनी बल्कि रात भर जागरण भी किया था। इसी वजह से राजा विदूरथ के घर उसका जन्म हुआ और राजा ने उसका नाम वसुरथ रखा। यही वसुरथ बड़ा होकर राजा बना। जब एक दिन वह शिकार के लिए निकला तो वो बीच में ही रास्ता भूल गया। थक हारकर वह एक पेड़ के नीचे जाकर सो गया। कुछ समय के बाद वहां पर म्लेच्छ आ गए और राजा को अकेला पाकर उन्होंने उसे मारने की कोशिश की। वह कहने लगे कि इसी राजा के कारण हमें देश निकाला दिया गया है इसलिए आज हम इसे मार देंगे। म्लेच्छों ने राजा पर हथियार फेंकना शुरू कर दिया। लेकिन म्लेच्छों के शस्त्र राजा पर फूल बनकर बरस रहे थे।
कुछ देर के बाद सभी म्लेच्छ की मृत्यु हो गई। जब राजा नींद से उठा तो उन्होंने देखा कि उसके आसपास कुछ लोग मृत पड़े हैं। कुछ देर सोचने के बाद राजा को समझ गया कि यह म्लेच्छ उसको मारने के लिए आए थे लेकिन किसी ने उन्हें मार दिया। इसके बाद राजा सोचने लगा कि जंगल में आखिर कौन उसकी जान बचाने के लिए आएगा। तभी आकाशवाणी हुई कि ‘हे राजन भगवान विष्णु ने तुम्हारी जान बचाई है। तुमने जो पिछले जन्म में अनजाने में ही आमलकी एकादशी की व्रत कथा सुनी थी उसी का फल है कि आज तुम्हारे शत्रु तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ पाए। इसके बाद से राजा ने भी एकादशी का व्रत रखना शुरू कर दिया।
आमलकी एकादशी पूजा विधि (Amalaki Ekadashi Puja Vidhi)
- आमलकी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत रखने का संकल्प लें।
- इसके बाद स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर विधि-विधान भगवान की पूजा करें।
- संभव हो तो इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी जरूर करें।
- पूजा संपन्न होने के बाद आंवले के पेड़ की पूजा करें।
- यदि आंवले का पेड़ नहीं हो तो आंवले के फल को भगवान विष्णु को अर्पित करें।
- इसके बाद किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं।
- फिर अगले दिन स्नान कर भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें।
- फिर जरूरतमंद को कलश, वस्त्र और आंवला आदि का दान करने के बाद आमलकी एकादशी व्रत का पारण कर लें।