Tuesday, February 17, 2026
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Falgun Amavasya Timing 2026: आज फाल्गुन अमावस्या कब तक रहेगी, जान लें इसकी टाइमिंग और महत्व

Written By: Laveena Sharma @laveena1693 Published : Feb 16, 2026 08:22 am IST, Updated : Feb 17, 2026 06:55 am IST

February Mein Amavasya Kab Hai 2026: फाल्गुन महीने में पड़नी वाली अमावस्या को फाल्गुन अमावस्या या फागुन अमावस्या कहते हैं। इस दिन व्रत रखने से सुख, संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। जान लें इस अमावस्या की सही डेट और टाइमिंग।

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Image Source : CANVA फरवरी में अमावस्या कब है 2026

February Mein Amavasya Kab Hai 2026: सनातन धर्म में फाल्गुन अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इस अमावस्या पर व्रत पूजन करने से सुख -शांति की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं ये दिन पितरों का श्राद्ध व तर्पण करने के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस अमावस्या पर पवित्र नदियों में देवी-देवताओं का वास होता है। इसलिए इस दिन नदी स्नान करना बेहद पुण्य का काम माना जाता है। चलिए आपको बताते हैं इस साल फाल्गुन अमावस्या कब पड़ रही है और इसकी टाइमिंग क्या रहेगी।

फरवरी में अमावस्या कब है 2026 (February Amavasya 2026 Date And Time)

फरवरी में फाल्गुन अमावस्या मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार अमावस्या का प्रारंभ 16 फरवरी की शाम 05:34 से होगा और समापन 17 फरवरी की शाम 05:30 पर होगा। उदया तिथि के अनुसार ये अमावस्या 17 फरवरी 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी।

फाल्गुन अमावस्या का महत्व (Falgun Amavasya Ka Mahtva)

कहते हैं फाल्गुन अमावस्या पर पवित्र नदियों में देवी-देवताओं का निवास होता है, इसलिए इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह अमावस्या सुख, संपत्ति और सौभाग्य में वृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है। ये हिंदू वर्ष की अंतिम अमावस्या होती है। ये अमावस्या पितरों के तर्पण के लिए भी श्रेष्ठ होती है। कहते हैं जब अमावस्या सोमवार, मंगलवार, गुरुवार या शनिवार के दिन पड़ती है तो यह सूर्यग्रहण से भी कई गुना ज्यादा फल देती है।

फाल्गुन अमावस्या पर क्या करना चाहिए (Falgun Amavasya Par Kya Karna Chahiye)

फाल्गुन अमावस्या पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें। इस दिन शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसो के तेल का दीपक जलाएं और अपने पितरों को स्मरण करें। फिर पेड़ की सात परिक्रमा लगाएं। इससे पितृ दोष से राहत मिलेगी। इस दिन भगवान शिव का दूध, दही, शहद से अभिषेक करें और उन्हें काले तिल अर्पित करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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