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Haridwar Ardh Kumbh: हरिद्वार अर्धकुंभ में साधु-संन्यासियों के साथ पहली बार होंगे 3 अमृत स्नान, तिथियों का हुआ ऐलान

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 13, 2025 02:48 pm IST,  Updated : Sep 13, 2025 02:48 pm IST

हरिद्वार में साल 2027 में अर्धकुंभ मेला लगेगा, इसे ऐतिहासिक अर्धकुंभ माना जा रहा है। इस अर्धकुंभ के दौरान तीन शाही या अमृत स्नान भी किए जाएंगे। तिथियों भी निर्धारित कर दी गई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

Haridwar Ardhkumbh- India TV Hindi
हरिद्वार अर्धकुंभ Image Source : PTI

Haridwar Ardh Kumbh: साल 2027 में अर्धकुंभ मेला धर्म नगरी हरिद्वार में लगेगा। आपको बता दें कि साल 2027 में हरिद्वार का अर्धकुंभ मेला बेहद खास माना जा रहा है। हरिद्वार के अर्धकुंभ में अब तक आम लोग ही कुंभ के दौरान स्नान करते थे लेकिन साल 2027 में साधु-संन्यासी और अखाड़े भी अर्धकुंभ में डुबकी लगाएं। अमृत स्नान की तिथियां भी अखाड़ा परिषद के द्वारा निर्धारित कर दी गई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में।  

हरिद्वार अर्धकुंभ होगा ऐतिहासिक 

हरिद्वार में होने वाला अर्धकुंभ मेला बेहद ऐतिहासिक माना जा रहा है। 2027 में पहली बार ऐसा होगा जब साधु-संन्यासियों के साथ वैरागी और उदासीन आखाड़े तीन अमृत या शाही स्नान करेंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी आप इस बात को सुनिश्चित कर दिया है। अखाड़ा परिषद के द्वारा साल 2027 में होने वाले अर्धकुंभ के दौरान अमृत स्नान करने की तिथियों का भी ऐलान कर दिया गया है। 

अर्धकुंभ 2027 में अमृत स्नान की तिथियां 

अखाड़ा परिषद के अनुसार हरिद्वार अर्धकुंभ का पहला शाही स्नान 6 मार्च को महाशिवरात्रि के पवित्र त्योहार के दौरान किया जाएगा। इसके बाद दूसरा स्नान सोमवती अमावस्या पर होगा जोकि 8 मार्च को है। अंतिम अमृत स्नान के लिए मेष संक्रांति का दिन तय किया गया है जोकि 14 मार्च को है। इससे पहले मकर संक्रांति पर भी स्नान किया जाएगा लेकिन इसे अमृत स्नान की श्रेणी में नहीं रखा गया है। आपको बता दें कि सरकार के द्वारा अभी अमृत स्नान की तारीखें घोषित नहीं की गई हैं लेकिन कुछ समय के उपरांत यह औपचारिकता भी पूरी कर दी जाएगी। सरकार की घोषणा के बाद ही अमृत स्नान के लिए बंदोबस्त की तैयारियां भी शुरू होंगी।   

क्यों खास है हरिद्वार अर्धकुंभ 2027?

हरिद्वार में होने वाला अर्धकुंभ मेला अब तक केवल श्रद्धालुओं के स्नान तक ही सीमित रहा है। इसका कारण यह है कि जिस साल हरिद्वार में अर्धकुंभ का आयोजन होता है उस साल उज्जैन या फिर त्र्यंबकेश्वर नासिक में सिंहस्थ पर्व मनाया जाता है। इसलिए हरिद्वार की बजाए संन्यासियों के अखाड़े उज्जैन या फिर त्र्यंबकेश्वर कूच कर जाते थे, क्योंकि अर्धकुंभ और सिंहस्थ पर्व लगभग कुछ दिनों की अंतराल में ही आयोजित होते थे। हालांकि साल 2027 में हरिद्वार में अर्धकुंभ मार्च-अप्रैल में है जबकि नासिक में सिंहस्थ पर 2027 जुलाई अगस्त में होगा। ऐसे में अखाड़ा परिषद को दोनों आयोजनों में हिस्सा लेने में आसानी होगी। इसीलिए साल 2027 के हरिद्वार अर्धकुंभ को विशेष माना जा रहा है और इस बार हरिद्वार में भी लोग अमृत स्नान का भव्य दृष्य देख पाएंगे। 

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