नई दिल्ली: बल्लेबाजी में धैर्य, शानदार तकनीक , विकेट पर खड़े रहने का संयम और एक एक रन के लिए मेहनत करने का जूनून, इन सब को मिला दे तो पुजारा और मुरली विजय जैसे शानदार बल्लेबाज बनते हैं। विजय ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में 8 महीने बाद वापसी की और मैदान पर उतरते ही जमाया धमाकेदार शतक। मुरली ने 221 गेंदों में बेहतरीन 128 रन बनाए। अपनी पारी में विजय ने 11 चौके और 1 शानदार छक्का लगाया. मुरली के टेस्ट करियर का ये 10वां शतक है।
8 महीने बाद टीम में जब मुरली की वापसी हुई थी तो कप्तान ने उनकी जगह केएल राहुल को तरजीह दी। उनके सामने एक बार फिर टीम में जगह पक्की करने की चुनौती थी। मौका अगले मैच में ही मिला जब धवन निजी वजहों से टीम से एक टेस्ट के लिए बाहर हो गए। मुरली ने इस मौके को मुरली ने दोनों हाथों से लपक लिया।
मुरली ने बतौर ओपनर 10वां शतक लगाया है। उनसे आगे 33 शतकों के साथ सुनील गावस्कर और 22 शतकों के साथ सहवाग है। मुरली ने शानदार शतक ठोककर साउथ अफ्रीका दौरे के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। मुरली की इस शतक में पुजारा का अहम रोल रहा। पुजारा ने एक बार फिर साबित किया कि वो टीम इंडिया की नई दीवार हैं। विकेट का मिजाज कैसा भी क्यों ना हो, परिस्थितियां किसनी भी विपरीत क्यों ना हो, लेकिन पुजारा पर इनका कोई फर्क नहीं पड़ता। वो ध्यान और धैर्य पूर्वक अपना क्रिकेट खेलते हैं ..नतीजा उनके नाम एक और शतक।
पुजारा ने अपना शतक 246 गेंदों में बनाया। इस दौरान उन्हें 11 चौके लगाए। पुजारा के टेस्ट करियर का ये 14 वां शतक है। पुजारा और मुरली ने शतक जमाकर कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। उन्होंने आज एक बार फिर 200 रन से ज्यादा की साझेदारी की। ऐसा तीसरी बार है जब मुरली और पुजारा के बीच 200 रन से ज्यादा की साझेदारी हुई। मुरली और पुजारा के बीच पिछली 4 पारियों में लगातार चौथी शतकीय साझेदारी है।
मुरली और पुजारा की अुशासन के साथ की गई बल्लेबाजी की बदौलत टीम इंडिया नागपुर टेस्ट में ड्राइविंग सीट पर है। नागपुर टेस्ट में बल्लेबाजों ने नकेल कस दिया है। बस अब जीत का इंतजार है।
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