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AI Summit: डीपफेक और चाइल्ड सेफ्टी पर बोले पीएम मोदी, कहा- और ज्यादा विजिलेंट होने की जरूरत

 Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
 Published : Feb 19, 2026 03:08 pm IST,  Updated : Feb 19, 2026 03:17 pm IST

AI Summit में पीएम मोदी ने डीपफेक, फेब्रिकेटेड कंटेंट और चाइल्ड सेफ्टी को लेकर और सख्ती करने के किए कहा है। नई दिल्ली में आयोजित समिट में पीएम मोदी ने एआई सेफ्टी को लेकर बड़े सवाल उठाए हैं।

PM Modi- India TV Hindi
पीएम मोदी Image Source : PTI

AI Impact Summit में पीएम मोदी ने डीपफेक से लेकर चाइल्ड सेफ्टी को लेकर सवाल उठाए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे दुनिया के सबसे बड़े एआई इवेंट में पीएम मोदी ने दुनिया के शीर्ष नेताओं और ग्लोबल टेक लीडर्स को एआई सेफ्टी को लेकर साथ आने के लिए कहा है। उन्होंने डीपफेक, फेब्रिकेटेड कंटेंट और चाइल्ट सेफ्टी को लेकर विजिलेंट होने की नसीहत दी है। पिछले दिनों केंद्रीय आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने भी एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग और डीपफेक कंटेंट पर सवाल उठाए थे।

डीपफेक की वजह से सोसाइटी हो रही प्रभावित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी AI Impact Summit को संबोधित करते हुए कहा कि डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट की वजह से समाज प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह के कंटेंट के लिए वाटरमार्किंग और क्लियर सोर्स स्टैंडर्ड सेट करने की जरूरत है। इसके अलावा वो ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी को लेकर भी और ज्यादा विजिलेंट होने की बात की है। नई दिल्ली में आयोजित इस एआई इम्पैक्ट समिट में दुनिया के लीडर्स के साथ-साथ टेक जगत की बड़ी हस्तियां भाग ले रहे हैं। इनमें गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन समेत एआई इंडस्ट्री के दिग्गज भारत आ चुके हैं।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि कुछ लोगों को नई टेक्नोलॉजी पर संदेह है लेकिन युवा पीढ़ी इसे हाथों-हाथ अपना रही है, जो अभूतपूर्व है। एआई इस मानव इतिहास में एक परिवर्तनकारी अध्याय है। भारत इस एआई क्रांति का केवल हिस्सा नहीं है, बल्कि वह इसका नेतृत्व भी कर रहा है और आकार भी तय कर रहा है। एआई समिट में केंद्रीय आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने भी डीपफेक को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि डीपफेक की वजह से लोगों का भरोसा खत्म हो रहा है।

20 फरवरी से लागू हो रहे डीपफेक के नए नियम

डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट को लेकर सरकार ने पिछले दिनों नए नियम जारी कर दिए हैं। ये नियम 20 फरवरी यानी कल से लागू हो जाएंगे। इसमें इंटरनेट पर सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन यानी SGI कंटेंट को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और इंटरनेट पर शेयर करते समय लेबलिंग अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि लोगों के लिए एआई जेनरेटेड कंटेंट और वास्तविक कंटेंट की पहचान करना आसान हो जाए।

नए नियम में कम्प्यूटिकृत जेनरेटेड वीडियो और SGI को नए सिरे से पारिभाषित किया गया है। इसमें कहा गया है कि जो ऑडियो-विजुअल कंटेंट एआई टूल्स या कम्प्यूटर ग्राफिक्स द्वारा बनाई गई है और देखने में यह वास्तविक व्यक्तियों और घटनाओं को चित्रित करती है उसे SGI माना जाएगा। इस तरह के कंटेंट को शेयर करते समय वाटरमार्किंग या लेबलिंग अनिवार्य है। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। इन कटेंट को सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जाने से पहले यूजर का डिक्लेयरेशन अनिवार्य कर दिया गया है। सोशल प्लेटफॉर्म को ऐसे कंटेंट को वेरिफाई करने के लिए तकनीकी टूल का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है।

सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फैलाए गए डीपफेक और अफवाहों को डाउन करने की समय सीमा को भी संशोधित किया गया है। ऐसे कंटेंट की शिकायत मिलने पर 36 घंटे की बजाय अब 3 घंटे में एक्शन लेने की बात कही गई है। रिस्पॉन्स टाइमलाइन को भी 15 दिनों से घटाकर 7 दिन और 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे कर दिया गया है। पीएम मोदी ने AI समिट में टेक कंपनियों और ग्लोबल लीडर्स से एआई जेनरेटेड कंटेंट को और सख्ती से रेगुलेट करने के लिए कहा है।

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