Viral Video : विदेशियों को भारतीय पोशाकें उनके जीवंत रंगों, उत्कृष्ट पारंपरिक कढ़ाई (जैसे ज़री, चिकनकारी), आरामदायक सूती कपड़ों और अनोखे सांस्कृतिक संगम के कारण पसंद आती हैं। साड़ी, कुर्ती और लहंगे जैसे परिधान शालीनता और भव्यता का मिश्रण हैं, जो पश्चिमी कपड़ों से भिन्न एक आरामदायक और शानदार विकल्प प्रदान करते हैं। ठीक इसी प्रकार एक अमेरिकी महिला को भी भारतीय पोशोकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का मौका मिला। अपने वीडियो में उसने दुपट्टे के आविष्कार के लिए भारतीयों को धन्यवाद दिया है।
इंस्टाग्राम पर वीडियो वायरल
इंस्टाग्राम पर इस वीडियो को @eczema.bread नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में शख्स ने लिखा है कि, 'भारतीयों, धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद। दुपट्टे की तरह स्कार्फ जिसे वे अपने कंधे या छाती पर ओढ़ते हैं।' उन्होंने वीडियो में कहा और आगे पूछा, 'क्या इसका आविष्कार भारतीयों ने किया था? अगर मैं गलत हूं तो मुझे सुधारें, लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा ही था। भारतीयों, धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद। दुपट्टे की तरह स्कार्फ जिसे वे अपने कंधे या छाती पर ओढ़ते हैं...आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, क्योंकि आपने मेरे पहनावे को सचमुच दस गुना बेहतर बना दिया है। मेरे पेज पर जाएं, और आपको मेरे कई ऐसे आउटफिट्स देखने को मिलेंगे जिनमें मैंने उस स्टाइल का इस्तेमाल किया है, और यह बहुत प्यारा है।'
सोशल मीडिया पर आईं प्रतिक्रिया
इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तकरीबन 2 मिलियन से ज्यादा बार देखा गया है। वीडिो को जबरदस्त लोकप्रियता मिली और इसे लगभग 20 लाख बार देखा गया और 75,400 लोगों ने इसे पसंद किया। यूज़र्स ने कमेंट सेक्शन में आकर सांस्कृतिक सराहना के लिए उनकी खूब तारीफ की। एक यूज़र ने कमेंट सेक्शन में लिखा, 'आपका स्वागत है। और हाँ, आप सही कह रही हैं, इसका आविष्कार भारतीयों ने किया है। जो लोग दक्षिण एशिया का नाम लेकर रो रहे हैं, वे भूल गए हैं कि ये भारत का ही हिस्सा हैं।' दूसरे ने लिखा किया है कि, 'ये तो बहुत प्यारा है। आमतौर पर मुझे ये रील्स देखकर बहुत गुस्सा आता है जिनमें भारतीय फैशन को क्रेडिट नहीं दिया जाता, लेकिन इसे देखकर मुझे बहुत खुशी हुई, जैसे कि... दुपट्टे सबसे अच्छे होते हैं। ये सचमुच पूरे आउटफिट को एक साथ लाते हैं। मुझे ये बहुत पसंद आया और मुझे खुशी है कि आपको भी ये पसंद आया।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, '?"दुपट्टे हज़ारों वर्षों से प्रचलन में हैं और इन्हें शरीर पर कई तरह से लपेटा जाता रहा है (गर्दन, छाती, कमर, कूल्हे, कहीं भी)। बीते सदियों में ही दुपट्टे महिलाओं के शरीर पर नियंत्रण और निगरानी रखने का साधन बन गए। यह धारणा भी अब बदल रही है। दुपट्टे अपने आप में दमनकारी नहीं हैं। यह परिधान सुंदर है और इसके जटिल इतिहास को याद रखते हुए इसका सम्मान किया जाना चाहिए।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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