Railway Interesting Facts : जब भी हम लोग कभी रेलवे स्टेशन पर खड़े होते हैं तो वहां से गुजरती कई ट्रेनों को देखते हैं। ट्रेनों को देखने के बाद मन में कई तरह के सवाल भी आते हैं। कुछ सवाल रेलवे स्टेशन के बेहतर होते इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर आते हैं तो कुछ सवाल ट्रेनों के डिब्बे पर दिखने वाली अजब-गजब चीजों को लेकर आते हैं। मसलन, ट्रेन के कोच पर लगे होने वाले बोर्ड, नंबर या पहियों का साइज और उनकी कीमत आदि। मगर, आज हम आपको किसी पैसेंजर या एक्सप्रस ट्रेन के बारे में नहीं बल्कि, मालगाड़ी से जुड़ा रोचक तथ्य बताने वाले हैं। क्या आपने कभी गौर किया है, मालगाड़ी के डिब्बे पर पहिये जैसे आकार का एक टूल लगा होता है, आखिर ये क्या होता है और इसे मालगाड़ी के डिब्बे पर क्यों लगाया जाता है ? आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं। साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे कि, मालगाड़ी के डिब्बे पर लगे पहिये जैसे टूल का क्या काम होता है ?
दरअसल, कई रिपोर्ट्स में ये दावा किया जाता है कि मालगाड़ी में 40 से 58 डिब्बे यानी वैगन हो सकंते हैं। दावा किया जाता है कि, मालगाड़ी के डिब्बे पैसेंजर ट्रेनों के कोच की तुलना में छोटे होते हैं, यही वजह है कि इसमें डिब्बे यानी वैगन की संख्या बढ़ा दी जाती है। नॉर्मल डिब्बों के अलावा मालगाड़ी में एक लोको और गार्ड वैन भी होती है।
आपको बता दें कि, सोशल मीडिया पर भी कई बार मालगाड़ी के कोच पर लगे पहिये जैसे टूल की फोटो लोग शेयर करते हैं और उसे लगाए जाने की वजह पूछते हैं। हालांकि, फेसबुक पर @KumarJha नामक हैंडल से शेयर की गई पोस्ट में इसका जवाब दिया गया है। इसके कैप्शन में लिखा है कि, 'मालगाड़ी में लगा यह गोलाकार हैंडल ब्रेक का काम करता है। जब मालगाड़ी चलती है तो इंजन से ही ब्रेक लगता है। लेकिन जब मालगाड़ी खड़ी होती है यार्ड में या ढलान पर तब इस पहिये को घुमाकर ब्रेक कसा जाता है इससे डिब्बे के पहियों पर ब्रेक शू दब जाते हैं और वैगन अपनी जगह से नहीं हिलता।'

उसी फेसबुक पोस्ट में बताया गया है कि, 'जब ये पहिया घुमाया जाता है तो अंदर लगी चेन/रॉड सिस्टम ब्रेक मैकेनिज्म को टाइट कर देता है और पहिये लॉक हो जाते हैं। जिससे ब्रेक लगता है। तो अब जब भी इसको देखें तो समझ जाना कि यह एक ब्रेकिंग सिस्टम है। और मालगाड़ी जब खड़ी रहे तो उसको बिना बात के घुमाएं न।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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