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दुनिया के सबसे उम्रदराज इस लीडर ने फिर जीता राष्ट्रीय चुनाव, 92 साल की उम्र में 8वीं बार बने कैमरून के राष्ट्रपति

The world oldest leader Paul Biya won another national election sworn in as Cameroon president at age of 92

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 06, 2025 11:16 pm IST, Updated : Nov 06, 2025 11:16 pm IST
92 साल की उम्र में कैमरून के राष्ट्रपति का चुनाव जीतने वाले नेता पाल बिया (बीच में)- India TV Hindi
Image Source : AP 92 साल की उम्र में कैमरून के राष्ट्रपति का चुनाव जीतने वाले नेता पाल बिया (बीच में)

याओंडे (कैमरून): कैमरून की राजधानी याउंडे में बुधवार को एक ऐतिहासिक क्षण घटित हुआ। दुनिया के सबसे उम्रदराज राज्य प्रमुख 92 वर्षीय पॉल बिया ने एक बार फिर भारी बहुमत से राष्ट्रीय चुनाव जीत लिया। पॉल बिया लगातार 8वीं बार कैमरून देश के राष्ट्रपति पद की शपथ ली। यह शपथ 27 अक्टूबर को हुए विवादास्पद राष्ट्रपति चुनाव में उनकी जीत के बाद ली गई, जिसमें उन्होंने 53.66 प्रतिशत वोट हासिल किए। 

विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप

बिया का यह सात वर्षीय कार्यकाल 1982 से जारी उनकी लंबी सत्ता यात्रा को और मजबूत करेगा, जो अफ्रीका की राजनीति में एक अनोखा रिकॉर्ड है। पॉल बिया का जन्म 13 फरवरी 1933 को हुआ। वे 1975 से प्रधानमंत्री रह चुके हैं और 1982 से राष्ट्रपति हैं। उनकी बढ़ती उम्र के बावजूद उन्हें चुनाव में कोई मजबूत चुनौती नहीं मिली। मुख्य विपक्षी नेता जॉन फ्रु नदी ने धांधली के आरोप लगाए, लेकिन संवैधानिक कोर्ट ने बिया की जीत को मंजूरी दी।

चुनाव के दौरान भड़की हिंसा 

चुनाव के दौरान हिंसा भड़की, जिसमें कम से कम चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई। याउंडे और अन्य शहरों की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर आंसू गैस के गोले और लाठियां चलानी पड़ीं। विपक्ष ने 'वोट चोरी' का नारा लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग की। शपथ समारोह भव्य था। संसद भवन में सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। बिया ने फ्रेंच और अंग्रेजी में शपथ ली। उन्होंने इस दौरान शपथ में कहा, "मैं कैमरून गणराज्य की रक्षा करूंगा।" उनकी पत्नी चंटाल ने समर्थन दिया। बिया ने भाषण में आर्थिक विकास और एकता पर जोर दिया, लेकिन युवाओं की बेरोजगारी और अंग्रेजी-भाषी क्षेत्रों के विद्रोह जैसे मुद्दों पर चुप्पी साधे रहे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी जीत को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने 'निष्पक्ष चुनाव' की मांग की, जबकि फ्रांस—कैमरून के पुराने सहयोगी ने बिया को बधाई दी। 

अफ्रीकी संघ ने की शांति की अपील

अफ्रीकी संघ ने कैमरून के लोगों से शांति की अपील की है। विश्लेषक कहते हैं कि बिया की सत्ता लंबे समय तक बनी रहेगी, लेकिन 50 प्रतिशत युवा आबादी असंतुष्ट है। क्या यह आखिरी कार्यकाल होगा? 92 वर्षीय बिया की सेहत पर सवाल उठ रहे हैं। कैमरून मध्य अफ्रीका का एक महत्वपूर्ण देश है, तेल और कोको उत्पादन से जीविका चलाता है। बिया का शासन स्थिरता लाया, लेकिन भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगते रहे। उनकी जीत ने एक बार फिर साबित किया कि अफ्रीका में 'जीवन भर की सत्ता' की परंपरा कायम है। दुनिया की नजरें अब इस बुजुर्ग नेता पर टिकी हैं क्या वे इतिहास रचेंगे या चुनौतियां उन्हें चुनौती देंगी?

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