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भारत, पाक को विशेष दूत भेजने की बीजिंग की योजना के कुरैशी के दावे पर चीन ने साधी चुप्पी

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 04, 2019 04:46 pm IST,  Updated : Mar 04, 2019 04:53 pm IST

चीन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इस दावे पर सोमवार को चुप्पी साधे रखी कि पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव को कम करने के लिए बीजिंग की एक विशेष दूत इन दोनों देशों में भेजने की योजना है।

China keeps mum on Qureshi's claim on Beijing's plan for...- India TV Hindi
China keeps mum on Qureshi's claim on Beijing's plan for special envoy to India, Pak

बीजिंग: चीन ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इस दावे पर सोमवार को चुप्पी साधे रखी कि पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव को कम करने के लिए बीजिंग की एक विशेष दूत इन दोनों देशों में भेजने की योजना है। हालांकि चीन ने यह जरूर कहा कि दोनों देश दोस्ताना बातचीत के जरिये मतभेद सुलझा सकते हैं। पाकिस्तान के मीडिया ने दो मार्च को कुरैशी के हवाले से कहा था कि चीन ने क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास में एक विशेष दूत को पाकिस्तान और भारत भेजने का फैसला किया है।

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कुरैशी के खबरों में आये बयानों के बारे में पूछे जाने पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, ‘‘हम वाकई उम्मीद करते हैं कि भारत और पाकिस्तान, जो दक्षिण एशिया के दो महत्वपूर्ण देश हैं, दोस्ताना बातचीत के माध्यम से संबंधित मुद्दों को सुलझा सकते हैं।’’ विशेष दूत भेजने की किसी भी योजना का जिक्र किये बिना उन्होंने कहा, ‘‘तनाव कम करने के लिए चीन ने भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ करीबी संवाद बनाये रखा है। क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए जो भी कारगर होगा, चीन वो सब करने का प्रयास करेगा और हम ऐसा करते रहेंगे।’’

जब पूछा गया कि जिस तरह रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, क्या चीन भी इसी तरह तैयार है, तो लू ने कहा, ‘‘हम तनाव कम करने और इस क्षेत्र में अमन तथा स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए कारगर सभी प्रयासों का स्वागत करते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल हम भारत और पाकिस्तान से करीबी संपर्क में रहे हैं और हम ऐसा करते रहेंगे तथा हितकारी भूमिका निभाते रहेंगे।’’ भारत मानता है कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।

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