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अमेरिका-भारत में छिड़े टैरिफ वार के बीच LAC विवाद पर आया चीन की सेना का बड़ा बयान, कही ये बात

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Aug 28, 2025 08:53 pm IST, Updated : Aug 28, 2025 08:56 pm IST

अमेरिका से छिड़े टैरिफ वार के बीच चीनी सेना ने भारत के साथ एलएसी विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। चीन की सेना ने दोनों देशों से सीमा पर शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की अपील की है।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी (बाएं) और एस जयशंकर ( बाएं)- India TV Hindi
Image Source : AP चीनी विदेश मंत्री वांग यी (बाएं) और एस जयशंकर ( बाएं)

बीजिंग: भारत और अमेरिका के बीच छिड़े टैरिफ वार के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) विवाद को लेकर चीन की सेना ने का बड़ा बयान सामने आया है। चीनी सेना पीएलए ने  बृहस्पतिवार को कहा कि हाल ही में भारत के साथ हुई सकारात्मक और रचनात्मक सीमा वार्ता में 10 बिंदुओं पर सहमति बनने के बाद दोनों देशों को अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।

चीनी रक्षा मंत्रालय ने जारी किया बयान

भारत और चीन के बीच इन दिनों नजदीकियां बढ़ने के बाद चीनी रक्षा मंत्रालय ने यह टिप्पणी की है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने कहाकि 19 अगस्त को दिल्ली में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच भारत-चीन सीमा वार्ता का 24वां दौर संपन्न हुआ। दोनों पक्षों ने सीमा मुद्दों पर गहराई से, स्पष्ट और सकारात्मक चर्चा की। इस वार्ता में 10 सूत्रीय आम सहमति बनी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की कि वे राजनयिक और सैन्य माध्यमों का उपयोग करते हुए सीमा प्रबंधन और नियंत्रण को मजबूत करेंगे। चर्चा सकारात्मक और रचनात्मक भावना में हुई, जिससे कई मुद्दों पर सहमति बनी।

द्विपक्षीय संबंधों में 75 वर्षों की साझेदारी

चीन के प्रवक्ता ने कहा कि चूंकि 2025 में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, ऐसे में दोनों देशों को यह अवसर द्विपक्षीय संबंधों को नवीन ऊर्जा देने के लिए उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन जैसे दो बड़े, पड़ोसी देश आपसी सम्मान, विश्वास, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, साझा विकास और परस्पर लाभकारी सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ सकते हैं।

डोभाल-वांग वार्ता के 5 ठोस परिणाम

इस वार्ता से पांच मुख्य परिणाम सामने आए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण सीमा परिसीमन है। इसमें प्रगति की संभावना तलाशने के लिए

परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र  के तहत एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच जटिल सीमा विवादों के समाधान की दिशा में व्यावहारिक पहल माना जा रहा है।

भारत और चीन के संबंधों में सुधार

बीजिंग का यह बयान भारत-चीन संबंधों में स्थिरता और संवाद बनाए रखने के प्रयासों को दर्शाता है। जहां एक ओर सीमा पर तनावों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिशें चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर 75 वर्षों की राजनयिक साझेदारी को एक सकारात्मक मोड़ देने की भी पहल हो रही है। दोनों देशों के इस नए संवाद से यह उम्मीद की जा रही है कि सीमा विवादों का समाधान संवाद और सहयोग के माध्यम से निकलेगा और एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।(भाषा)

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