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दिल्‍ली को जहरीली हवा से निजात दिलाने के लिए चीन ने भारत की तरफ बढ़ाया हाथ; जानें किस मॉडल से अपने शहरों को किया साफ

चीन ने भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। चीन ने कहा है वो वायु प्रदूषण से निपटने के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है। चलिए ऐसे में यह भी जानते हैं कि चीन ने कैसे अपने शहरों को वायु प्रदूषण से मु्क्त किया है।

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927
Published : Nov 05, 2025 12:53 pm IST, Updated : Nov 05, 2025 12:53 pm IST
City In China Whers Condition Of Air Pollution Before And After Shown- India TV Hindi
Image Source : @CHINASPOX_INDIA (X) City In China Whers Condition Of Air Pollution Before And After Shown

China Offers To Help India Fight Delhi Toxic Air: भारत की राजधानी दिल्ली इन दिनों गैस चैंबर बनी हुई है। लोग जहरीली हवा की गिरफ्त में हैं और यहां सांस लेना मुश्किल हो गया है। आसमान में काले धुंए की चादर नजर आ रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर ये संकट साल दर साल गंभीर होता जा रहा है। दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई तरह के कदम भी उठाए गए हैं जो अब तक नाकाफी ही साबित हुए हैं।

चीन ने बढ़ाया मदद का हाथ

दिल्ली की जहरीली हवा को देखते हुए पड़ोसी देश चीन ने भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “चीन भी कभी गंभीर स्मॉग से जूझता था। अब हमारे आसमान नीले हैं। हम भारत के साथ अपना अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं, और हमें भरोसा है कि भारत भी जल्द वहां पहुंचेगा।”

जानें दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा का हाल

चीन को अपने शहरों में फैले वायु प्रदूषण से कैसे मुक्ति मिली। चीन ने किस मॉडल पर काम किया है ये हम आपको खबर में आगे बताएंगे लेकिन उसे पहले दिल्ली और आसपास के इलाकों की हवा पर एक नजर डाल लेते हैं। दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 400 के पार पहुंच चुका है, जो गंभीर श्रेणी में आता है। दिल्ली के अलीपुर में AQI 420, आनंद विहार 403 और बवाना 390 के आसपास दर्ज हुआ है। नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में भी हवा की हालत बेहद खराब रही। गाजियाबाद के लोनी में 420 का स्तर पार हो गया है, यानी सांस लेना भी खतरा है।

कैसे साफ हुए चीन के शहर?

चलिए अब उस मॉडल पर नजर डालते हैं या फिर उन कदमों के बारे में जानते हैं जिससे चीन के शहर साफ और जहरीली हवा से मुक्त हुए हैं। पिछले 2 दशकों में चीन दुनिया के सबसे प्रदूषित देशों में गिना जाता था। बीजिंग, शंघाई, और ग्वांगझो जैसे शहरों में धुंध (स्मॉग) की मोटी परत नजर आती थी। लेकिन, 2013 के बाद से चीन ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय शुरू किए जिसका असर भी दिखा। चीन ने जो काम किया वो अब पूरी दुनिया के लिए 'मॉडल' बन चुका है।

Delhi Air Pollution

Image Source : AP
Delhi Air Pollution

चीन ने क्या किया? 

2013 में चीन ने “Air Pollution Prevention and Control Action Plan” लागू किया। यह देश का पहला व्यापक वायु स्वच्छता अभियान था। इस योजना तहत लक्ष्य निर्धारित किए गए। कोयले पर निर्भरता घटाने का लक्ष्य तय हुआ। औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़े मानक बनाए गए साथ ही बड़े शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की निगरानी शुरू की गई। इसके साथ ही प्रदूषक उद्योगों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए। इस राष्ट्रीय नीति के कारण चीन की हवा बदल गई।

चीन में उठाए गए कड़े कदम

चीन ने प्रदूषित शहरों से लाखों पुराने वाहनों को सड़क से हटाया। इलेक्ट्रिक बसें और टैक्सियां बड़ी संख्या में चलाई गईं। साइकिल लेन और मेट्रो नेटवर्क का विस्तार किया गया ताकि लोग निजी गाड़ियां कम चलाएं। चीन ने हजारों फैक्ट्रियों को आधुनिक तकनीक अपनाने पर मजबूर किया। इस्पात, सीमेंट, और कोयला आधारित उद्योगों को उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने पड़े। जो उद्योग नियमों का पालन नहीं करते थे, उन्हें भारी जुर्माना या बंदी का सामना करना पड़ा।

चीन में किए गए सुधार कार्य

चीन ने केवल प्रदूषण कम करने पर ध्यान नहीं दिया बल्कि पर्यावरण को दोबारा पुनर्जीवित करने पर भी ध्यान दिया। शहरों में लाखों पेड़ लगाए गए और ग्रीन बेल्ट बनाई गए। ग्रीन बिल्डिंग कोड लागू हुआ ताकि नई इमारतें ऊर्जा कुशल हों। सौर और पवन ऊर्जा को तेजी से बढ़ाया गया। सरकार ने पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता को भी प्राथमिकता दी। स्कूलों में पर्यावरण से जुड़े विषय जोड़े गए।

Beijing Air Pollution

Image Source : AP
Beijing Air Pollution

दुनिया के लिए प्रेरणा है चीनी मॉडल

ऐसे में कहा जा सकता है कि चीन ने यह दिखा दिया कि अगर सरकार की नीतियां स्पष्ट हों, जनता सहयोग करे और तकनीक का सही उपयोग हो तो वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है। चीनी मॉडल आज भारत सहित कई विकासशील देशों के लिए प्रेरणा बन चुका है। चीन का यह स्वच्छ हवा मॉडल बताता है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ चल सकते हैं बस नीति, विज्ञान और जनभागीदारी का संतुलन जरूरी है।

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