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जेनेवा के विश्व मंच पर भारत ने खुलकर दिया ईरान का साथ, दुनिया रह गई देखती; ईरानी राजदूत ने गदगद होकर जताया आभार

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jan 24, 2026 04:59 pm IST,  Updated : Jan 24, 2026 05:00 pm IST

भारत ने यूएनएचआरसी के मंच पर खुलकर ईरान के समर्थन में वोट किया है। इसके लिए ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से भारत सरकार का आभार जताया है।

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली - India TV Hindi
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली Image Source : X@IRANAMBINDIA

जेनेवाः भारत ने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के मंच पर ईरान का खुलकर साथ दिया है। ईरान भारत की इस मदद का कायल हो गया है। दरअसल भारत ने जेनेवा में यूएनएचआरसी के मंच पर ईरान के खिलाफ लाए गए एक वैश्विक प्रस्ताव का विरोध किया और खुलकर ईरान के पक्ष में वोटिंग की। इसके बाद भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक्स पोस्ट के माध्यम से मोदी सरकार के इस कदम की भूरि-भूरि प्रशंसा की। 

फथाली ने एक्स पर किया ये पोस्ट

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शनिवार को X पर एक पोस्ट में भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "मैं संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में ईरान के समर्थन में भारत सरकार के सैद्धांतिक और दृढ़ रुख के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिसमें एक अन्यायपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रस्ताव का विरोध करना भी शामिल है। यह रुख न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"ईरानी राजदूत ने इसे भारत की न्याय, बहुपक्षवाद और राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब बताया।" 

यूएनएचआरसी में ईरान के खिलाफ लाया गया था प्रस्ताव

जेनेवा में शुक्रवार को UNHRC के 39वें विशेष सत्र में ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों पर कथित क्रूर दमन की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव में ईरान के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय फैक्ट-फाइंडिंग मिशन के कार्यकाल को दो वर्ष और बढ़ाने, हिंसक दमन की निंदा करने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव को 25 देशों के समर्थन मिला, जबकि भारत समेत 7 देशों ने इसके विरोध में वोट किया। विरोध करने वाले सात देशों में भारत, चीन, पाकिस्तान, इराक, इंडोनेशिया, क्यूबा और वियतनाम शामिल थे। 

भारत ने ईरान के खिलाफ प्रस्ताव को माना राजनीति से प्रेरित

भारत ने ईरान के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव को पश्चिमी देशों द्वारा प्रायोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित माना, जो ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप है। ईरान ने भी इसे "पोलिटिसाइज्ड" और बाहरी हस्तक्षेप बताया तथा अस्वीकार किया। ईरान में हाल के महीनों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कथित दमन से हजारों मौतें और गिरफ्तारियां हुई हैं, जिस पर पश्चिमी देशों ने जोरदार आलोचना की। UNHRC ने इसे "अभूतपूर्व" दमन करार दिया और जांच को गहरा किया। भारत की ओर से विरोध बहुपक्षवाद, संप्रभुता और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों पर आधारित था, जो भारत की विदेश नीति का मूल है। 

भारत के कदम की ईरान ने की तारीफ

राजदूत फथाली ने भारत के इस कदम को सराहा है। यह दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाता है। ईरान और भारत के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से चला आ रहा है, और ऐसे मौकों पर एक-दूसरे का समर्थन दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहता है। यह घटना अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को भी उजागर करती है, जहां वह पश्चिमी दबाव के बावजूद अपने सिद्धांतों पर अडिग रहती है।

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