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हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान, कहा-बांग्लादेश की मांग पर किया जा रहा विचार

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। बांग्लादेश ने भारत से मानव अपराध मामले में मौत की सजा पाई पूर्व पीएम शेख हसीना को प्रत्यर्पित किए जाने का अनुरोध किया है।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 26, 2025 08:38 pm IST, Updated : Nov 26, 2025 08:38 pm IST
शेख हसीना, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री- India TV Hindi
Image Source : AP शेख हसीना, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री

नई दिल्लीः बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश द्वारा किए गए अनुरोध पर भारत विचार कर रहा है।  विदेश मंत्रालय ने बुधवार को पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में कहा कि बांग्लादेश सरकार का हसीना को सौंपने का अनुरोध मिला है और इसे न्यायिक तथा आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पूरी गंभीरता से देखा जा रहा है।

5 अगस्त को हसीना आई थीं भारत

पूर्व पीएम 78 वर्षीया शेख हसीना पिछले साल 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े जन-आंदोलन के बाद सत्ता से बेदखल हो गई थीं। उसी दिन वह सैन्य हेलिकॉप्टर से भारत आ गई थीं और तब से नई दिल्ली में ही रह रही हैं। पिछले हफ्ते ढाका की एक विशेष अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में 2024 के आंदोलन में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवाने के आरोप में “मानवता के खिलाफ अपराध” का दोषी ठहराते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने भारत से हसीना का प्रत्यर्पण मांगा था। 

विदेश मंत्रालय ने दिया बयान

बुधवार को विदेश मंत्रालय के साप्ताहिक ब्रीफिंग में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण का जो औपचारिक अनुरोध आया है, उस पर भारत की न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत विचार किया जा रहा है। हम कोई जल्दबाजी नहीं करेंगे।” उन्होंने आगे जोड़ा, “भारत बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध है। हम वहां शांति, स्थिरता, लोकतंत्र और समावेशी विकास चाहते हैं। हम सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखेंगे।”


भारत-बांग्लादेश के बीच क्या है प्रत्यर्पण समझौता

भारत और बांग्लादेश के बीच 1970 के दशक में हुआ प्रत्यर्पण समझौता राजनीतिक अपराधों को प्रत्यर्पण से बाहर रखता है। विशेषज्ञों का कहना है कि “मानवता के खिलाफ अपराध” को राजनीतिक अपराध नहीं माना जाता, इसलिए कानूनी रास्ता खुला है, लेकिन अंतिम फैसला भारत सरकार को ही करना है। हसीना अभी दिल्ली के सख्त सुरक्षा घेरे में हैं। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह भारत छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। इस मामले ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले बढ़ने की खबरों के बाद भारत पहले ही चिंता जता चुका है। अब प्रत्यर्पण का अनुरोध भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक इम्तिहान बन गया है। (पीटीआई)

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