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अमेरिका दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और जापान के साथ कर रहा था था गश्त, चीन ने दौड़ा दिए अपने फाइटर जेट

 Published : Nov 16, 2025 06:44 pm IST,  Updated : Nov 16, 2025 06:44 pm IST

दक्षिण चीन सागर में बड़ा बवंडर मच गया है। अमेरिका के नेतृत्व में गश्ती कर रहे फिलीपींस और जापान की सेनाओं को चीन ने अपने फाइटर और बॉम्बर जेटों को दौड़ा कर सीधे चेतावनी दी है। इससे समुद्र में बवंडर आ गया है।

अमेरिका दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और जापान के साथ गश्त के दौरान।- India TV Hindi
अमेरिका दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और जापान के साथ गश्त के दौरान। Image Source : AP

बीजिंग: दक्षिण चीन सागर के विवादित जलक्षेत्र में एक बार फिर तनाव भड़क उठा है। अमेरिका, फिलीपींस और जापान की नौसेनाओं द्वारा शुक्रवार-शनिवार को आयोजित दो-दिवसीय संयुक्त समुद्री अभ्यास के जवाब में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने पहली बार 'बॉम्बर फॉर्मेशन गश्त' का संचालन किया। इस दौरान चीन के फाइटर जेट ने अमेरिकी के नेतृत्व वाले गश्ती दलों का पीछा कर लिया। यह कदम फिलीपींस को स्पष्ट "चेतावनी" के रूप में देखा जा रहा है, जो बाहरी शक्तियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति को खतरे में डाल रही है। 

 

चीन ने अमेरिकी गश्ती दल के ऊपर दौड़ाए बॉम्बर जेट

चीन की दक्षिणी थिएटर कमांड ने शनिवार को घोषणा की कि उसके बॉम्बर विमानों ने नान्शा द्वीपसमूह और हुआंगयान डाओ (स्कारबोरो शोल) क्षेत्रों पर उड़ान भरी। दक्षिणी थिएटर कमांड के प्रवक्ता, वरिष्ठ कर्नल तियान जुनली ने बयान जारी कर कहा, "फिलीपींस ने बार-बार बाहरी ताकतों के साथ सांठगांठ कर तथाकथित 'संयुक्त गश्त' की है, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही है। हम फिलीपीनी पक्ष को चेतावनी देते हैं कि वह उकसावे और तनाव बढ़ाने की हरकतें तुरंत बंद करे।" यह पहली बार है जब चीन ने बॉम्बर फॉर्मेशन गश्त के रूप में इस तरह की कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा की है। 

 

दक्षिण चीन सागर पर चीन करता है अपना दावा

वैश्विक व्यापार का 30 प्रतिशत हिस्सा ढोने वाले दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर चीन अपना दावा करता है। फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के साथ उसके समुद्री विवाद लंबे समय से चले आ रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी इन अभ्यासों को "मुक्त और खुला इंडो-पैसिफिक" सुनिश्चित करने का नाम देते हैं, लेकिन बीजिंग इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह गश्त फिलीपींस की "भड़काऊ कार्रवाइयों" का सीधा जवाब थी, जहां यूएसएस कार्टर हॉल जैसे युद्धपोतों ने हिस्सा लिया। 

 

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी हो सकती है प्रतिद्वंद्विता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना एशिया-प्रशांत क्षेत्र में महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता को और तेज कर सकती है। जापान-फिलीपींस रक्षा समझौते के बाद ऐसे अभ्यास बढ़े हैं, जो चीन को "टेम्प्लेट" के रूप में चेतावनी दे रहे हैं।  फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर ने अभ्यास को "सफल" बताते हुए कहा कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। वहीं चीन ने साफ लफ्जों में कहा कि कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं होगा। यह तनाव 2016 के हैग ट्रिब्यूनल फैसले की याद दिलाता है, जहां फिलीपींस के दावों को समर्थन मिला था, लेकिन चीन ने इसे खारिज कर दिया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन सागर के नीले जल में तूफान के बादल मंडरा रहे हैं। क्या यह नए शीत युद्ध की शुरुआत है? (एपी)

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