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ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी लॉटरी सिस्टम को खत्म करने का रखा प्रस्ताव, नए नियम किए जारी

 Published : Sep 23, 2025 10:56 pm IST,  Updated : Sep 23, 2025 11:25 pm IST

टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी भारतीय आईटी दिग्गज कंपनियां एच-1बी वीजा पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। नए नियमों के तहत वीजा आवंटन अब स्किल्ड स्तर और सैलरी के आधार पर होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप- India TV Hindi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप Image Source : AP

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए मौजूदा लॉटरी सिस्टम को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। नए नियमों के तहत वीजा आवंटन अब स्किल्ड स्तर और सैलरी के आधार पर वेटेड चयन प्रक्रिया से होगा न कि रैंडम ड्रॉ से होगा।

हाई स्किल्ड और हाई पेड पर आधारित होगी प्रक्रिया

होमलैंड सुरक्षा विभाग का नया प्रस्ताव लॉटरी सिस्टम को समाप्त कर एक चयन प्रक्रिया को लागू करने का है, जो सामान्यतः हाई स्किल्ड और हाई पेड वाले विदेशियों को एच-1बी वीजा आवंटित करने के पक्ष में होगा। साथ ही जॉब करने वालों के लिए सभी वेतन स्तरों पर एच-1बी कर्मचारियों को सुरक्षित करने का अवसर बनाए रखेगा।

वेतन के स्तर के आधार पर होगा चयन

इस नए प्रस्ताव के अनुसार, चयन उनके वेतन के स्तर के आधार पर होगा। चार वेतन स्तरों में से सबसे ऊंचे स्तर पर आने वाले कर्मचारियों, जिनका सालान वेतन $162,528 है उनको चयन पूल में चार बार शामिल किया जाएगा और सबसे निचले स्तर पर आने वालों को केवल एक बार शामिल किया जाएगा।

हाई स्किल वाले उम्मीदवारों को मिलेगी प्राथमिकता

मंगलवार को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस के अनुसार, यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) ने 'कैप-सब्जेक्ट एच-1बी पेटिशन के लिए रजिस्ट्रेंट्स और पेटिशनर्स का वेटेड सिलेक्शन प्रोसेस' नामक प्रस्तावित नियम जारी किया है। इसके तहत आवेदनों को वेतन स्तर के आधार पर वेटेज दिया जाएगा, जिससे ज्यादा वेतन वाले और हाई स्किल वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी।

1,00,000 डॉलर का लगाया था शुल्क

बता दें कि पिछले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप ने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें प्रत्येक नए आवेदन के लिए 1,00,000 डॉलर का शुल्क लगाने की घोषणा की गई थी। इस वीजा के जरिए अमेरिका में कंपनियां लॉटरी सिस्टम के जरिए तकनीक और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर सकती थीं।

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