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"अमेरिका आर्थिक रूप से हो सकता है तबाह", जानें राष्ट्रपति ट्रंप ने क्यों कही ये बात

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Sep 05, 2025 07:01 am IST, Updated : Sep 05, 2025 10:30 am IST

ट्रंप सरकार ने अदालत में यह भी दलील दी है कि विभिन्न देशों पर लगाए गए शुल्कों को यदि अवैध ठहराया गया, तो वसूले गए करों को वापस लौटाना पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी राजकोष पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा।

डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति। - India TV Hindi
Image Source : AP डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति।

वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के आर्थिक रूप से तबाह होने का खतरा जताया है। ट्रंप ने यह बात अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट में कही है। बता दें कि टैरिफ लगाने के खिलाफ आए निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने ट्रंप सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि आयात शुल्क से जुड़े मामले में शीघ्र और निर्णायक निर्णय दिया जाए। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका की आर्थिक तबाही की आशंका भी जाहिर की है। 

ट्रंप को क्यों है अमेरिका की आर्थिक तबाही की आशंका

ट्रंप का दावा है कि यदि अमेरिका के प्रतिद्वंद्वियों और सहयोगियों पर लगाए गए आयात शुल्क को रोका गया, तो देश "आर्थिक तबाही के कगार" पर पहुंच सकता है। यह बयान ट्रंप प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए दस्तावेज़ों में दर्ज किया गया है, जिसमें "आर्थिक तबाही" जैसे शब्दों का प्रयोग असाधारण माना जा रहा है।

आपातकालीन शक्तियों पर सवाल

यह मामला उस अपील अदालत के फैसले से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश शुल्क आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग का उदाहरण हैं। ट्रंप प्रशासन ने अब सुप्रीम कोर्ट से उस फैसले को पलटने का अनुरोध किया है। फिलहाल, ये शुल्क लागू हैं, लेकिन इनके क्रियान्वयन को लेकर उठे विवादों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव और उच्च कीमतों व धीमी आर्थिक वृद्धि की आशंकाएं पैदा कर दी हैं।

शुल्क के ज़रिए कूटनीतिक दबाव

राष्ट्रपति ट्रंप ने इन शुल्कों का उपयोग यूरोपीय संघ के अलावा भारत, चीन, जापान और ब्राजील जैसे तमाम अन्य देशों पर नए व्यापार समझौते स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने में भी किया है। अगस्त 2025 के अंत तक इन शुल्कों से अमेरिका को कुल 159 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है।

यूक्रेन युद्ध का भी हवाला

सॉलिसिटर जनरल डी. जॉन सॉयर ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह एक सप्ताह के भीतर यह तय करे कि नवंबर के पहले सप्ताह में इस मामले की सुनवाई होनी चाहिए या नहीं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह मामला केवल व्यापार का नहीं, बल्कि यूक्रेन में रूस के खिलाफ युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों से भी जुड़ा है।

टैरिफ हटाने से बर्बाद हो जाएगा यूएस

सॉयर ने लिखा, "राष्ट्रपति और उनके कैबिनेट ने यह तय किया है कि ये शुल्क अमेरिका में शांति और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं। यदि इन्हें अदालत के आदेश पर हटाया गया तो देश व्यापारिक प्रतिशोध के खतरे में पड़ सकता है और प्रभावी सुरक्षा के अभाव में आर्थिक तबाही का सामना करना पड़ सकता है।"(एपी)

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