पटना: बिहार ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुशासन और विकास की एक नया मकाम दर्ज किया है इस बात कोई अतिश्योक्ति नहीं है। पटना में मेट्रो के बाद अब अल्ट्रापॉड प्रोजेक्ट की तैयारी है। जी हां,पटना में प्रमुख सरकारी एवं प्रशासनिक भवनों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से लगभग 296 करोड़ रुपये की लागत से अल्ट्रापॉड्स पर्सनल रैपिड ट्रांजिट (पीआरटी) प्रणाली का निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अल्ट्रापॉड (अर्बन लाइट ट्रांजिट पॉड) एक स्वचालित परिवहन नेटवर्क है। इसका उद्देश्य निर्धारित मार्ग पर बिना किसी बाधा के संपर्क उपलब्ध कराना है। बिहार सरकार के कैबिनेट सचिवालय के बयान के अनुसार मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस प्रस्तावित प्रणाली को लेकर लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कंपनी ने परियोजना के बारे में जानकारी दी। बयान में कहा गया है कि इस परियोजना की लागत लगभग 296 करोड़ रुपये होगी और अल्ट्रापॉड ट्रैक करीब पांच किलोमीटर लंबा होगा। यह विश्वेश्वरैया भवन से शुरू होकर विकास भवन और विधानसभा भवन से होते हुए पुराने सचिवालय तक जाएगा।
विभाग का लक्ष्य प्रशासनिक मंजूरी मिलने के 15 महीनों के भीतर अल्ट्रापॉड्स पीआरटी प्रणाली का निर्माण पूरा करना है। अधिकारियों ने बताया कि पीआरटी प्रणाली के तहत पॉड बिना अनियोजित ठहराव के चलेंगे और यात्रियों को सीधे उनके गंतव्य स्टेशन तक पहुंचाएंगे। इस योजना के मुताबिक ट्रैक पर कुल 59 पॉड चलेंगे, जिनमें प्रत्येक में अधिकतम 6 यात्री यात्रा कर सकेंगे। स्टेशनों पर हर सात सेकंड के अंतराल पर पॉड उपलब्ध होंगे।
शुरुआती फेज में नौ स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें से दो स्टेशनों पर पार्किंग की सुविधा भी होगी। परियोजना के तहत एक नियंत्रण कक्ष और अल्ट्रापॉड पार्किंग सुविधा भी स्थापित की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यह ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पर्यावरण अनुकूल और 'कार्बन पॉजिटिव' होगा तथा ट्रैक के निर्माण के दौरान किसी भी पेड़ की कटाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा यह प्रणाली सरकारी कामकाज के लिए मोटर वाहनों के उपयोग को कम करने में मदद करेगी, जिससे उत्सर्जन घटेगा और प्रशासनिक क्षेत्र में, विशेषकर सुबह और शाम के कार्यालय समय के दौरान, यातायात दबाव कम होगा। बयान के अनुसार इस सेवा का किराया नाममात्र रखा जाएगा और यात्री टोकन या रिचार्जेबल कार्ड के माध्यम से इसका उपयोग कर सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल भारत सरकार की 'स्मार्ट, सतत और एकीकृत गतिशीलता' की परिकल्पना के अनुरूप है।
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