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‘आवारा नहीं, हमारा है’, मंदिर में पढ़ी गई हनुमान चालीसा, कुत्तों की रक्षा के लिए अब भगवान के दर पर पहुंचे प्रदर्शनकारी

 Published : Aug 19, 2025 11:02 am IST,  Updated : Aug 19, 2025 11:08 am IST

दिल्ली में आवारा कुत्तों का मुद्दा काफी गर्माया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, अब एक संगठन ने मंदिर में पूजा-अर्चना भी करनी शुरू कर दी है।

आवारा कुत्ते- India TV Hindi
आवारा कुत्ते Image Source : PTI

आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें आश्रय स्थलों में भेजने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कई संगठनों ने आपत्ति जताई है। विरोध प्रदर्शन करने के दौरान पशु प्रेमी और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने सोमवार देर रात ईश्वर की शरण में भी पहुंचे। उन्होंने आवारा कुत्तों की रक्षा के लिए अब भगवान से प्रार्थना की है। 

रात 12 बजे सीपी के हनुमान मंदिर में पूजा

पशु अधिकार कार्यकर्ता कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर और बंगला साहिब गुरुद्वारा में इकट्ठा हुए। कार्यकर्ताओं ने बताया कि प्रार्थना सभा सोमवार देर रात 12 बजे हनुमान मंदिर में शुरू हुई, जिसमें लगभग 200 लोगों ने भाग लिया। 

हनुमान चालीसा का हुआ पाठ

‘आवारा नहीं, हमारा है’ के नारे लिखे बैनर लेकर लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और फिर वे बंगला साहिब गुरुद्वारे की तरफ चल पड़े। हालांकि, पुलिस ने उन्हें बंगला साहिब के बाहर ही रोक दिया। 

सुप्रीम कोर्ट अपना आदेश वापस ले

एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘कई दिनों के विरोध-प्रदर्शन से हम थक चुके हैं, इसलिए आज हम यहां ईश्वर की शरण में आए हैं ताकि वह हमें इस संघर्ष में शक्ति दें।’ कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट से आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने के अपने आदेश को वापस लेने की मांग पर अड़े रहेंगे। 

बेजुबान जानवरों को उठाना बंद करे सरकार

कार्यकर्ताओं ने कहा, ‘पहले हमारा संघर्ष इसके लिए था कि दिल्ली में कुत्तों के लिए कोई उचित आश्रय स्थल नहीं है। अब हम चाहते हैं कि सरकार रात में सड़कों से इन बेजुबान जानवरों को उठाना बंद करे।’ 

जानिए क्या बोले सुप्रीम कोर्ट के जज?

न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा था कि ‘पूरी समस्या’ स्थानीय निकायों की ‘निष्क्रियता’ के कारण उत्पन्न हुई है। हालांकि, न्यायालय ने अपने 11 अगस्त के दिशा-निर्देशों के कुछ हिस्सों पर रोक लगाने के अनुरोध वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। (भाषा के इनपुट के साथ)

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