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यूपी के प्राइमरी टीचर्स को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ट्रांसफर पॉलिसी की गई रद्द

 Published : Nov 08, 2024 04:49 pm IST,  Updated : Nov 08, 2024 04:51 pm IST

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के हजारों जूनियर शिक्षकों हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार की स्थानांतरण नीति को रद्द कर दिया।

हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार की स्थानांतरण नीति को किया रद्द (सांकेतिक फोटो)- India TV Hindi
हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकार की स्थानांतरण नीति को किया रद्द (सांकेतिक फोटो) Image Source : FILE

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों के हजारों जूनियर शिक्षकों को राहत देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने के लिए इस वर्ष जून में लाई गई सरकार की स्थानांतरण नीति को रद्द कर दिया। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 26 जून, 2024 को जारी सरकारी आदेश के प्रासंगिक प्रावधानों को "मनमाना और भेदभावपूर्ण" करार देते हुए रद्द कर दिया।

न्यायमूर्ति मनीष माथुर की पीठ ने पुष्कर सिंह चंदेल सहित जूनियर शिक्षकों द्वारा अलग-अलग दायर 21 रिट याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इस नीति के तहत केवल जूनियर शिक्षकों का ही तबादला किया जाता है, जबकि वरिष्ठ या पुराने शिक्षक अपने विद्यालयों में ही बने रहते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने चुनौती देते हुए क्या दलील दी थी?

याचिकाकर्ताओं ने 26 जून के सरकारी आदेश और उसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग के 28 जून के परिपत्र के खंड 3, 7, 8 और 9 को चुनौती देते हुए दलील दी थी कि उक्त प्रावधान समानता के मौलिक अधिकार के साथ-साथ शिक्षा के अधिकार अधिनियम के भी विपरीत हैं।

विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता एच जी एस परिहार, यू एन मिश्रा और सुदीप सेठ ने संयुक्त रूप से तर्क दिया कि उपरोक्त प्रावधानों के अनुपालन में, शिक्षक-छात्र अनुपात को बनाए रखने के लिए केवल उस शिक्षक को ट्रांसफर किया जाता है, जिसे बाद में प्राइमरी स्कूल में नियुक्त किया जाता है। 

इसमें कहा गया कि ट्रांसफर के बाद जब ऐसे टीचर को नए प्राइमरी स्कूल में नियुक्त किया जाता है, तो वहां भी उसकी सेवा अवधि सबसे कम होने के कारण शिक्षक-छात्र अनुपात बनाए रखने के लिए यदि दोबारा किसी शिक्षक को स्थानांतरित करने की आवश्यकता होती है, तो नवनियुक्त शिक्षक को ही ट्रांसफर किया जाता है। यह भी तर्क दिया गया कि उक्त नीति शिक्षकों की सेवा नियमों के विरुद्ध है।

राज्य सरकार ने क्या कहा? 

वहीं, राज्य सरकार की तरफ से याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को ट्रांसफर पॉलिसी को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षक-छात्र अनुपात को बनाए रखने के लिए यह ट्रांसफर पॉलिसी जरूरी है।

कोर्ट ने क्या कहा? 

अपना फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि 26 जून 2024 के सरकारी आदेश और 28 जून 2024 के परिपत्र में सेवा अवधि को उक्त स्थानांतरण नीति का आधार बनाने को उचित ठहराने का कोई उचित कारण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह नीति जारी रही तो हर बार जूनियर शिक्षक को ट्रांसफर के माध्यम से समायोजित कर दिया जाएगा और सीनियर हमेशा वहीं रहेगा जहां वह है। कोर्ट ने आगे कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों में यह पाया गया है कि उक्त ट्रांसफर नीति भेदभावपूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 14 के अनुरूप नहीं है। (Input- PTI)

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