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यूपी सरकार ने सभी स्कूलों के लिए जारी किए अहम नोटिस, बच्चों को लेकर बनाई गाइडलाइन

Edited By: Shailendra Tiwari @@Shailendra_jour Published : Aug 14, 2024 06:42 am IST, Updated : Aug 14, 2024 06:42 am IST

यूपी में राज्य सरकार की ओर से सभी स्कूलों के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि उनके स्कूलों में बच्चों को किसी भी प्रकार की हिंसा का सामना न करना पड़े।

UP- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO यूपी सरकार ने सभी स्कूलों के लिए जारी किए अहम नोटिस

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सभी स्कूलों के लिए एक अहम नोटिस जारी किया है। नोटिस के मुताबिक, सरकार ने सभी स्कूलों में बच्चों के प्रति शारीरिक और मानसिक, सभी प्रकार के दंड पर रोक लगाने के अपने निर्देशों पर फिर से जोर दिया है। नोटिस के मुताबिक, गाइडलाइन 10 अक्तूबर 2007 को जारी सरकारी आदेश के अनुरूप ही हैं, इस आदेश के तहत किसी भी बच्चे पर शैक्षणिक संस्थानों में शारीरिक दंड पर पूर्णता बैन है।

बच्चों के साथ इस तरह की घटना हिंसक

आदेश में आगे कहा गया कि बच्चों को पीटना, डांटना, परिसर में दौड़ाना, चुटकी लेना, डंडे से मारना, थप्पड़ मारना, बच्चों को घुटनों के बल बैठाना, यौन उत्पीड़न, पीड़ा देना, बच्चों को कक्षाओं में अकेले बंद करना, बिजली के झटके देना और इसी तरह के अन्य अपमानजनक, हानिकारक या घातक कृत्य नहीं होने चाहिए। इस तरह की सज़ा को बच्चों के अधिकारों के प्रति असंवेदनशीलता और हिंसक माना गया है।

नोटिस में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के गाइडलाइन पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसके मुताबिक, बच्चों को शारीरिक दंड के खिलाफ बोलने के उनके अधिकार के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है। हॉस्टल, बाल संरक्षण गृहों और सार्वजनिक संस्थानों सहित स्कूलों को ऐसा माहौल बनाने करने की आवश्यकता है, जहाँ बच्चे अपनी बात कह सकें।

बिना डरे कह सकें अपनी बात

अभिभावक-शिक्षक समितियों या इसी तरह के निकायों को मासिक आधार पर शिकायतों और की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। माता-पिता और छात्र दोनों ही बदले के डर के बिना शारीरिक दंड के बारे में सोचे अपनी चिंता जाहिर कर सकते हैं। शिक्षा विभाग को शिकायतों और की गई कार्रवाई की निगरानी के लिए ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर समीक्षा प्रक्रियाएँ भी बनानी चाहिए।

किसी के साथ भेदभाव न हो

निर्देशों में उत्तर प्रदेश सरकार के फ्री और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियम भी शामिल हैं, जिसके मुताबिक स्थानीय अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना है कि कोई जाति, वर्ग, धर्म या लिंग आधारित भेदभाव न हो। इसमें कक्षाओं में, भोजन के दौरान, खेल के मैदानों और अन्य स्कूल सुविधाओं में भेदभावपूर्ण व्यवहार को रोकना शामिल है।

जारी किया गया टोल फ्री नंबर

नोटिस में कहा गया है, "छात्रों, अभिभावकों और आम जनता की शिक्षा से संबंधित शिकायतों के हल के लिए मुख्यमंत्री द्वारा जून 2024 में एक टोल-फ्री नंबर 1800-889-3277 शुरू किया गया था। साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि इस टोल-फ्री नंबर को जिले के प्रत्येक स्कूल के नोटिस बोर्ड या मुख्य द्वार पर स्थायी रूप से लिखा जाए। साथ ही इस नंबर पर मिले शिकायतों और सुझावों की राज्य स्तर पर निगरानी की जाएगी और पोर्टल के माध्यम से मिले शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाना चाहिए।"

हाल ही में, एनसीपीसीआर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश जारी किया है कि वे स्कूलों में त्यौहारों के दौरान बच्चों को शारीरिक दंड और भेदभाव से बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई करें। यह निर्देश उन छात्रों की कई रिपोर्टों के बाद आया है, जिन्हें रक्षा बंधन जैसे त्यौहारों के दौरान राखी, तिलक या मेहंदी लगाने जैसी सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं के लिए परेशान किया जाता है।

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