म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान के नाम का डंका पूरी दुनिया में बजता है। ऑस्कर अवॉर्ड विनिंग सिंगर आज सफलता के जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष का नतीजा है। आज सफलता के शिखर पर बैठे एआर रहमान ने अपनी जिंदगी में कई मुश्किल दिन भी देखे हैं। खासतौर पर अपने पिता के निधन के बाद वह बुरी तरह टूट गए थे। मुश्किलों से जूझते हुए उन्होंने अपनी तकदीर लिखी और आज हर किसी के लिए वह एक मिसाल बन चुके हैं। एआर रहमान अक्सर अपने परिवार के बारे में हल्की-फुल्की बातें साझा करते दिखाई दे जाते हैं, लेकिन वह अपने पिता के बारे में बात करने से हमेशा बचते आए हैं। उन्होंने एक बार खुद इस वजह का खुलासा किया था। आज यानी 6 जनवरी को इस महान शख्सियत का जन्मदिन है, इस मौके पर आपको वो वजह बताते हैं, जिसके चलते एआर रहमान अपने पिता के बारे में बात नहीं करते।
एआर रहमान की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर
एआर रहमान का जन्म एक हिंदू परिवार में हुआ था और उनके बचपन का नाम दिलीप कुमार था और उनके नाम बदलने की कहानी उनकी आस्था या विश्वास से नहीं, बल्कि कड़े परिश्रम और जिंदगी को लेकर उनके नजरिए से जुड़ी है। उनकी जिंदगी में ये दौर उनके पिता आर के शेखर के निधन के बाद हुआ, जो खुद अपने समय के जाने-माने संगीतकार थे। उन्होंने मुख्य तौर पर मलयालम सिनेमा के लिए काम किया और 100 से ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत निर्देशक के रूप में काम किया। एआर रहमान को संगीत की शिक्षा अपने पिता से ही मिली थी। बताया जाता है कि आर के शेखर कैंसर से पीड़ित थे और इलाज के दौरान एक सूफी संत भी उनका इलाज किया करते थे। पिता के निधन के बाद एआर रहमान मानसिक शांति की तलाश में थे और ये मानसिक शांति उन्हें सूफी में मिली। बस इसी अनुभव के चलते उन्होंने इस्लाम और सूफी को अपना लिया और दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान बन गए।
दर्दनाक था पिता का अंत
एआर रहमान ने निखिल कामथ के पॉडकास्ट में अपने पिता के अंतिम दिनों और उन्हें याद न करने की वजह बताई थी। उन्होंने बताया कि उनके पिता का अंत इतना दर्दनाक था, कि इसके बारे में सोचकर आज भी वह सिहर उठते हैं, यही वजह है कि वो उनके बारे में बात करने से बचते हैं। उन्होंने अपने पिता के आखिरी दिनों के बारे में बात करते हुए बताया था कि उनके पिता की हालत आखिरी में इतनी बिगड़ गई थी कि वह कंकाल बन गए थे और उनकी मौत आज भी उन्हें किसी डरावने सपने जैसी लगती है।
पिता की अच्छी यादें हमेशा याद करते हैं
एआर रहमान ने बातचीत के दौरान कहा था- 'मेरे पिता की उदारता, दयालुता और खुशमिजाज अंदाज आज भी मुझे जिंदगी में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। लेकिन, उनके आखिरी दिन बिलकुल भी अच्छे नहीं थे। उनका अंत बहुत दर्दनाक था। आखिरी दिनों में उनका चेहरा स्केलेटन जैसा हो गया था। हड्डियां गलने लगी थीं और उनका वो हाल मेरे लिए बहुत ज्यादा दर्दनाक था। लेकिन, मुझे आज भी लगता है कि उनका आशीर्वाद मेरे और मेरी बहनों के साथ है।' अपनी मां के बारे में बात करते हुए एआर रहमान ने कहा था- 'मेरी मां बहुत मजबूत इंसान हैं। उनके साथ जो कुछ भी हुआ, उन्होंने अपनी जिंदगी में जो कुछ भी सहा, उसके बाद भी कभी हार नहीं मानी।'
9 साल की उम्र में सिर से उठ गया था पिता का साया
एआर रहमान उन दिनों 9 साल के थे, जब उनके सिर से उनके पिता का साया हमेशा-हमेशा के लिए उठ गया था। उनके पिता के निधन के साथ ही उनके और उनके परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए थे। परिवार की जिम्मेदारी एआर रहमान के कंधे पर आ गई, उनका स्कूल छूट गया और इसी के साथ बचपन भी। घर में उनके पिता के अलावा कोई और कमाने वाला नहीं था। ऐसे में उनके निधन के बाद सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और कमाई के लिए उन्होंने पिता के म्यूजिकल इक्विमेंट किराए पर देना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे खुद रहमान ने भी म्यूजिक की ओर कदम बढ़ाए और टीवी के लिए जिंगल्स बनाने लगे। फिर उन्हें 'रोजा' में ऑफर मिला और इसमें उनके गाने की खूब तारीफ हुई। इसी के साथ एआर रहमान का करियर भी चल निकला।
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