दिल्ली के मंत्रियों कपिल मिश्रा, मनजिंदर सिंह सिरसा और आशीष सूद ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने की आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के बाद नारेबाजी की यह घटना हुई।
विरोध प्रदर्शन के वीडियो से पता चला कि कोर्ट द्वारा जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद सोमवार रात को जेएनयू के छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय परिसर के अंदर पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए।
दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, ‘सांपों के फन कुचले जा रहे हैं, संपोले बिलबिला रहे हैं। नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में नारे लगाने वाले हताश हैं क्योंकि उनके नापाक मंसूबे एक-एक करके ध्वस्त हो रहे हैं। इन अपराधियों का समर्थन करने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।’

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ प्रदर्शन करना अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, ‘अगर लोग अदालती फैसलों का विरोध करना शुरू कर देंगे तो व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।’
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समूह देश को कमजोर करना चाहते हैं। दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कुछ नेता और पार्टियां गंभीर मामलों में आरोपी व्यक्तियों के साथ खड़े हैं, जिसे उन्होंने शांति भंग करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि लोगों को शिक्षा, पानी, सुरक्षा या किसानों से संबंधित कार्यक्रमों सहित सरकारी नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की आजादी है, लेकिन राजनीतिक चर्चा में मर्यादा होनी चाहिए एवं कोई भी गतिविधि राष्ट्र के खिलाफ नहीं होनी चाहिए।
मंत्री सूद ने कहा कि सांसद-विधायक अपनी निजी राय व्यक्त कर सकते हैं, लेकिन विधानसभा और सरकार का एजेंडा संवैधानिक दायरे के भीतर ही रहना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक करनैल सिंह ने ऐसे नारे लगाने वालों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की प्रमुख शक्तियों में से एक है और ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
भाजपा नेता हरीश खुराना ने कहा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा ऐसे व्यक्तियों को समर्थन देने पर भी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं सोमवार को खारिज कर दीं।
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