हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता सुरेश ओबेरॉय 79 साल की उम्र में भी अभिनय की दुनिया में एक्टिव हैं। 2 साल पहले सुरेश ओबेरॉय 'एनिमल' में रणबीर कपूर के दादा के किरदार को लेकर चर्चा में रहे। सुरेश ओबेरॉय किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं, वह इंडस्ट्री के सबसे दिग्गज नामों में शुमार हैं। उन्होंने बड़े पर्दे पर विलेन से लेकर सपोर्टिंग एक्टर तक के किरदार निभाए और दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनके द्वारा निभाए किरदार आज भी याद किए जाते हैं। हालांकि, उनके लिए ये सफर इतना भी आसान नहीं था। यूं तो सुरेश ओबेरॉय एक बड़े और रईस परिवार से ताल्लुक रखते थे, उनके पिता आनंद सरूप ओबेरॉय एक रियल एस्टेट व्यवसायी थे। लेकिन, भारत-पाकिस्तान विभाजन के चलते उन्होंने अपना सब खो दिया।
पाकिस्तान में हुआ था सुरेश ओबेरॉय का जन्म
सुरेश ओबेरॉय का जन्म पाकिस्तान के क्वेटा (तत्कालीन ब्रिटिश इंडिया, अब पाकिस्तान) में 17 दिसंबर 1946 को हुआ था। जब सुरेश सिर्फ एक साल के थे, उनका परिवार विभाजन की त्रासदी के चलते पाकिस्तान से भारत आ गया। उनके पिता आनंद सरूप ओबेरॉय का क्वेटा में अच्छा-खासा रियल एस्टेट का व्यवसाय था, लेकिन विभाजन के चलते उन्हें अपनी जमीन-जायदाद से हाथ धोना पड़ा। सब छोड़कर वह भारत आ गए और ऐसे में उन्हें तंगहाली में गुजारा करना पड़ा।
व्यवसायी का बेटा होकर भी तंगहाली में गुजारे दिन
सुरेश ओबेरॉय अक्सर उन दिनों के बारे में बात करते रहे हैं, जब उनके परिवार को तंगहाली मं गुजारा करना पड़ा। जब उनका परिवार भारत आया, वह सिर्फ 1 साल के थे। पिता एक बड़े कारोबारी थे, लेकिन विभाजन के चलते सब हाथ से निकल गया। सुरेश ओबेरॉय चार भाई-बहन थे, बड़ा परिवार होने के चलते गुजारा भी मुश्किल हो गया। धीरे-धीरे करके हालत खराब होती गई और एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें चीनी-रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। परिवार का दर्द देखकर आखिरकार सुरेश ओबेरॉय के पिता ने हिम्मत जुटाई और पाकिस्तान पहुंच गए। वहां जाकर उन्होंने नई वेश-भूषा धरी और अपनी प्रॉपर्टी बेची। इससे जो पैसे मिले, उसे लेकर वो वापस भारत लौट आए और फिर हैदराबाद में जाकर बस गए।
पिता ने शुरू की मेडिकल स्टोर्स की चेन
हैदराबाद में सुरेश ओबेरॉय के पिता ने मेडिकल स्टोर्स की चेन शुरू की। धीरे-धीरे करके हालत बेहतर होने लगे और फिर उनके परिवार के अच्छे दिन आए। अपने परिवार को लग्जरी देने के लिए आनंद सरूप ओबेरॉय ने बंगला-गाड़ी सब खरीदा और सबकी पढ़ाई पूरी कराई। वहीं सुरेश ओबेरॉय ने एक्टर बनने का फैसला लिया और एफटीआईआई से अभिनय की ट्रेनिंग ली। 1977 में उन्होंने 'जीवन मुक्त' से डेब्यू किया। शुरुआत में कई फिल्मों में लीड रोल करने पर जब सफलता नहीं मिली तो सपोर्टिंग और निगेटिव रोल करने लगे, जिसने उन्हें पहचान दिलाई।
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