Saturday, February 14, 2026
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Assi Review: कानी कस्तूरी ने संभाली कमान, तापसी लड़खड़ाईं, अनुभव सिन्हा की ‘अस्सी’ इरादों में बड़ी, असर में आधी

Jaya Dwivedie Published : Feb 14, 2026 09:31 pm IST, Updated : Feb 14, 2026 09:31 pm IST

अस्सी एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म है जो महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाती है। कानी कुसरुति का सधा अभिनय फिल्म की ताकत है, जबकि तापसी पन्नू औसत लगती हैं। अनुभव सिन्हा की मंशा मजबूत है, लेकिन कमजोर पटकथा और ढीला निर्देशन असर क

Taapsee Pannu- India TV Hindi
Photo: INSTAGRAM@TAAPSEE तापसी पन्नू
  • फिल्म रिव्यू: Assi
  • स्टार रेटिंग: 3 / 5
  • पर्दे पर: 20 Feb 2025
  • डायरेक्टर: Anubhav Sinha
  • शैली: इनवेस्टिगेटिव कोर्ट रूम ड्रामा और थ्रिलर

अनुभव सिन्हा की फिल्मों के बारे में एक दिलचस्प बात हमेशा कही जाती है, वो क्या कहना चाहते हैं, यह अक्सर साफ होता है, लेकिन वे उसे किस तरह कह रहे हैं, यही असली कसौटी बन जाता है। उनकी नई फिल्म अस्सी इसी नाजुक रस्सी पर संतुलन साधने की कोशिश करती दिखाई देती है। यह एक ऐसी फिल्म है जो अपने विषय की गंभीरता के कारण सम्मान चाहती है पर सिनेमाई प्रस्तुति में कई बार ठिठक जाती है। अस्सी एक गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है। यह मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज की एक कड़वी सच्चाई दिखाने के लिए बनाई गई है। फिल्म महिलाओं की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे पर बात करती है, खासकर दिल्ली जैसे शहर में जहां इस विषय पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। फिल्म की शुरुआत एक चौंकाने वाले आंकड़े से होती है, भारत में हर साल लगभग 30,000 बलात्कार के मामले दर्ज होते हैं। यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि समाज के लिए एक बड़ा सवाल है। क्या हम इस समस्या को रोकने के लिए सच में कुछ कर रहे हैं? फिल्म यह भी साफ करती है कि सभी पुरुष अपराधी नहीं होते, लेकिन जो अपराध करते हैं, उन्हें शर्म महसूस करनी चाहिए।

कहानी

कहानी परीमा (कानी कुसरुति) के इर्द-गिर्द घूमती है। एक रात वह अकेली घर लौट रही होती है। रास्ते में उसका अपहरण कर लिया जाता है और उसके साथ बहुत बुरा व्यवहार होता है। बाद में उसे रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया जाता है। फिल्म इस घटना को दिखाने के बजाय उसके बाद के दर्द और मानसिक हालत पर ज्यादा ध्यान देती है। परीमा के लिए न्याय की लड़ाई लड़ती हैं वकील रावी (तापसी पन्नू)। वह पूरी कोशिश करती हैं, लेकिन केस कमजोर पड़ता जाता है। परीमा अपराधियों की पहचान नहीं कर पाती। डीएनए रिपोर्ट मेल नहीं खाती। पक्के सबूत नहीं मिलते। कोर्ट में बहस होती है, लेकिन वह उतनी मजबूत नहीं लगती जितनी होनी चाहिए थी। कहानी में आगे “अम्ब्रेला मैन” नाम का एक रहस्यमयी आंदोलन सामने आता है। यह सिस्टम से निराश लोगों की आवाज बनता है और अपने तरीके से न्याय की बात करता है। लेकिन फिल्म इस हिस्से को ज्यादा गहराई से नहीं दिखा पाती। कहानी का विषय मजबूत है, लेकिन लिखावट में कुछ कमियां हैं। आज के समय में मोबाइल लोकेशन और डिजिटल सबूत जैसे पहलुओं को और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। क्लाइमैक्स भी थोड़ा लंबा और खिंचा हुआ लगता है।

अभिनय

कानी कुसरुति का अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने अपने किरदार को बहुत शांत और सच्चे तरीके से निभाया है। वह ज्यादा संवाद नहीं बोलतीं, लेकिन उनकी आंखें और चेहरे के भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। तापसी पन्नू ने वकील की भूमिका निभाई है। उन्होंने पहले भी पिंक और मुल्क जैसी फिल्मों में कोर्टरूम में मजबूत अभिनय किया है। इस फिल्म में भी कुछ जगह वह प्रभाव छोड़ती हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन पूरी फिल्म में एक जैसा मजबूत नहीं रहता। मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब एक शांत पति की भूमिका में हैं। उनका अभिनय सधा हुआ है। अस्पताल वाला दृश्य, जहां वह बेटे को संभालते हैं, दिल को छूता है। कुमुद मिश्रा को उतना मजबूत किरदार नहीं मिला है। आर्टिकल 15 में उनका काम ज्यादा प्रभावशाली था। यहां उनका किरदार पूरी तरह उभर नहीं पाता। रेवती ने अच्छा और संतुलित अभिनय किया है। बाकी कलाकारों को ज्यादा अवसर नहीं मिला।

निर्देशन

फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पहले थप्पड़ और अनेक जैसी फिल्में बनाई हैं। अस्सी में भी उनका मकसद साफ है,समाज को सोचने पर मजबूर करना। हालांकि कुछ जगह निर्देशन कमजोर पड़ता है। कोर्ट के दृश्य और ज्यादा मजबूत हो सकते थे। “अम्ब्रेला मैन” वाला हिस्सा भी और बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। फिल्म में कई अच्छे विचार हैं, लेकिन उन्हें पूरी ताकत से पेश नहीं किया गया।

तकनीकी पक्ष

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी अच्छी है। कई दृश्य ऐसे हैं जहां कैमरा स्थिर रहता है और किरदार फ्रेम में अलग तरीके से दिखते हैं। इससे एक अलग तरह की गंभीरता महसूस होती है। बैकग्राउंड म्यूजिक ठीक है और तनाव बनाए रखता है। गाने खास याद नहीं रहते। एडिटिंग थोड़ी ढीली है। अगर फिल्म थोड़ी छोटी और तेज होती, तो असर ज्यादा होता। प्रोडक्शन डिजाइन असली और विश्वसनीय लगता है।

निष्कर्ष

अस्सी एक जरूरी फिल्म है। यह आपको सोचने पर मजबूर करती है और समाज के एक गंभीर मुद्दे को सामने लाती है। इसमें अच्छी बातें भी हैं और कमजोरियां भी। कहानी मजबूत है, लेकिन लेखन और प्रस्तुति में कमी रह जाती है। अभिनय में कानी कुसरुति सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। यह फिल्म परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसका विषय महत्वपूर्ण है। यह फिल्म पूरी तरह संतुष्ट नहीं करती, लेकिन आपको सोचने पर जरूर मजबूर करती है। रेटिंग: 3/5

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