21वीं सदी में टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई तरह का कंटेंट उपलब्ध है, जिसके बारे में सोशल मीडिया पर हर छोटी-बड़ी अपडेट भी मिलती रहती है। हालांकि, एक दौर ऐसा भी था जब हर किसी के घर पर टेलीविजन या फोन नहीं होता था और तब वह अपना मनोरंजन बहुत ही अलग तरीके से किया करते थे। उस वक्त टीवी पर कुछ देखना एक खास अनुभव हुआ करता था, जो शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है तब दूरदर्शन ही एकमात्र विकल्प था और रोज हर कार्यक्रम अपने तय समय पर प्रसारित होता था। हर कंटेंट का अपना एक अलग स्लॉट हुआ करता था। भेल उन दिनों कंटेंट सीमित था, लेकिन उसका दर्शकों पर गहरा असर होता था। आज हम उसी दौर के एक खौफनाक हॉरर शो के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 'आहट' से पहले 1989 में आया था। इस भारतीय शो का हर एपिसोड बहुत ही शानदार था, जिसकी कहानी भूल पाना नामुमकिन है।
रहस्यमयी किले का खौफ
1989 में दूरदर्शन पर आए हम, जिस भारतीय टेलीविजन हॉरर शो की बात कर रहे हैं। उसे देख बच्चों से लेकर बड़ों तक के बीच खौफ का माहौल बना रहता था। 'आहट' के बारे में तो हर किसी ने सुना है, लेकिन इसे देखकर लोग डर से कांप जाया करते थे और अपनी आंखें तक बंद करने की हिम्मत नहीं कर पाते थे। ये शो रात करीब 11 बजे प्रसारित होता था और इसे शुरू होते ही सन्नाटा छा जाता था। डर लगने के बावजूद भी दर्शक इसे बिना देखे नहीं रह पाते थे। ये सीरियल हफ्ते में सिर्फ एक दिन आता था, लेकिन इसकी डरावनी कहानी लोगों के दिलों-दिमाग में बस जाती थी। इस शो के हर एपिसोड में हैरान करने वाले रहस्य होते थे। इस शो का नाम था 'किले का रहस्य'
8.9 रेटिंग वाला हॉरर शो
इस शो की कहानी एक रहस्यमयी किले के इर्द गिर्द घूमती थी, जिसे लोग भुतहा बताते हैं। शो में देखने को मिलता है कि कैसे इस किले के अंदर जो भी जाता है, उसकी पीठ पर कुछ अजीब सा निशान बन जाता है और फिर उसकी मौत ही हो जाती है। अंत में पता चलता है कि ये किसी भूत-प्रेत ने किया है या फिर इंसान की साजिश है। यह पूरा शो रहस्यमयी मौत और हत्या की जांच पर केंद्रित है। 'किले का रहस्य' को IMDb पर 8.9 रेटिंग मिली है। दूरदर्शन के 'किले का रहस्य' सीरियल में मशहूर रंगकर्मी, लेखक और अभिनेता पीयूष मिश्रा लीड रोल में नजर आए थे। इसमें वीरेंद्र सक्सेना भी थे।
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