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Explainer: DRDO ने किया स्क्रैमजेट इंजन का जमीनी परीक्षण, हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए क्यों खास है ये टेस्ट?

 Published : Jan 22, 2025 12:44 pm IST,  Updated : Jan 22, 2025 01:20 pm IST

DRDO ने हाल ही में हाइपरसोनिक मिसाइलों के लिए स्क्रैमजेट इंजन का जमीनी परीक्षण पूरा किया है। इस परीक्षण को भविष्य के हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।

DRDO ने स्क्रैमजेट इंजन का जमीनी परीक्षण किया।- India TV Hindi
DRDO ने स्क्रैमजेट इंजन का जमीनी परीक्षण किया। Image Source : PIB

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO ने हाल ही में स्क्रैमजेट कम्बस्टर का सफल जमीनी परीक्षण पूरा किया है। इस परीक्षण से भारत को उन्नत पीढ़ी के हाइपरसोनिक मिसाइलों के निर्माण की क्षमता बढ़ाने में अहम उपलब्धि हासिल हुई है। रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ये परीक्षण डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने पूरा किया है। आइए जानते हैं कि डीआरडीओ द्वारा स्क्रैमजेट कम्बस्टर के परीक्षण का मकसद क्या है और इसकी इस सफलता से भारत के डिफेंस सेक्टर को क्या फायदा होगा।

क्यों खास है ये टेस्ट?

रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डीआरडीओ ने लंबी अवधि के सुपरसोनिक कम्बस्टर, रैमजेट या स्क्रैमजेट से संचालित हाइपरसोनिक तकनीक को विकसित करने की पहल की है। DRDL ने हाल ही में इन तकनीकों को विकसित किया है और भारत में पहली बार 120 सेकंड के लिए एडवांस्ड कूल्ड स्क्रैमजेट कम्बस्टर का सफल जमीनी परीक्षण करने में कामयाही हासिल की है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये सफल परीक्षण अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक मिसाइल को विकसित करने के लिए एक अहम मील का पत्थर है।

हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होते हैं?

दरअसल, हाइपरसोनिक मिसाइल वर्तमान में दुनिया के सबसे आधुनिक, घातक और अचूक हथियारों में से एक है। हाइपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की गति से पांच गुना या 5,400 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से उड़ान भरती है। इन मिसाइलों में एयर डिफेंस सिस्टम से बचने की क्षमता होती है जिससे इन्हें रोका जाना नामुमकिन जैसा है। हाइपरसोनिक मिसाइल तेजी से बड़े स्तर के हमले कर सकने में सक्षम होती है। हाइपरसोनिक मिसाइलों की तकनीक वर्तमान में केवल अमेरिका, रूस, भारत और चीन जैसे गिने-चुने देशों के पास ही मौजूद है।

जानिए स्क्रैमजेट के बारे में

किसी हाइपरसोनिक वाहन की कुंजी स्क्रैमजेट को माना जाता है। स्क्रैमजेट्स एयर ब्रिदिंग इंजन होते हैं जो कि किसी भी मूविंग पार्ट को इस्तेमाल किए बिना सुपरसोनिक स्पीड से कम्बशन बनाए रखने में सक्षम होते हैं। DRDO द्वारा स्क्रैमजेट कम्बस्टर के जमीनी परीक्षण ने कई उपलब्धियों को हासिल किया है। इनमें सफल इग्निशन और स्थिर कम्बशन जैसी कामयाबी शामिल है। आपको बता दें कि स्क्रैमजेट इंजन में इग्निशन किसी तूफान में मोमबत्ती जलाकर रखने जैसा काम है। स्क्रैमजेट कम्बस्टर में फ्लेम को स्थिर रखने की तकनीक होती है। ये  1.5 किमी/सेकेंड से ज्यादा हवा की गति के दौरान कम्बस्टर में फ्लेम को लगातार जला कर रखती है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

स्क्रैमजेट इंजन के सफल जमीनी परीक्षण के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी है। उन्होंने कहा- "‘यह उपलब्धि अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक अभियानों के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।" वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर वी कामत ने भी डीआरडीएल टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।

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