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Budh Pradosh Vrat Katha In hindi: बुध प्रदोष व्रत की कथा पढ़ने से मिलेगा धन-बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद

Budh Pradosh Vrat Katha Today: आज साल का आखिरी प्रदोष व्रत है। बुधवार के दिन पड़ने के कारण ये बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा। यहां हम आपको बताएंगे इस दिन प्रदोष काल के समय कौन सी कथा पढ़नी चाहिए।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Dec 17, 2025 07:06 am IST, Updated : Dec 17, 2025 02:46 pm IST
Budh pradosh- India TV Hindi
Image Source : CANVA बुध प्रदोष व्रत कथा

Budh Pradosh Vrat Katha Today: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। जब ये व्रत बुधवार के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। मान्यताओं अनुसार इस दिन विधि विधान पूजा करने और व्रत कथा पढ़ने से भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है। बता दें 17 दिसंबर को बुध प्रदोष व्रत की पूजा का समय शाम 05:27 से रात 08:11 बजे तक रहेगा। अब चलिए आपको बताते हैं इस व्रत की पावन कथा के बारे में।

बुध प्रदोष व्रत कथा (Budh Pradosh Vrat Katha)

एक समय की बात है एक पुरुष का नया-नया विवाह हुआ। विवाह के 2 दिनों बाद ही उसकी पत्‍नी मायके चली गई। कुछ दिनों बाद पुरुष अपनी पत्‍नी को लेने उसके घर पहुंचा। बुधवार के दिन जब वह पत्‍नी को ले जाना लगा तो उसे ससुराल वालों ने इस दिन ले जाने से मना कर दिया। लेकिन वह फिर भी नहीं माना और जबरदस्ती पत्नी को विदा करा लाए। विवश होकर सास ससुर ने अपने जमाई और पुत्री को भारी मन से विदा किया।

जब वे दोनों नगर के बाहर पहुंचे तो पत्नी को प्यास लगी। पुरुष पानी की तलाश में चल पड़ा। पत्‍नी जाकर एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर बाद जब पुरुष पानी लेकर वापस लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्‍नी किसी के साथ हंस-हंसकर बातें कर रही है और किसी उसके लोटे से पानी भी पी रही है। ये देखकर उसे क्रोध आ गया। जब वह निकट पहुंचा तो उसने देखा कि उस आदमी की सूरत बिल्कुल उसी की तरह है। पत्‍नी भी ये देखकर सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष आपस में झगड़ने लगे। धीरे धीरे वहां भीड़ एकत्रित हो गई और नगर के सिपाही भी आ गए। हमशक्ल आदमियों को देख हर कोई हैरान था। 

सिपाहियों ने स्त्री से पूछा कि तेरा पति कौन है? वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। तब वह पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे आज बहुत बड़ी भूल हुई कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन अपनी पत्‍नी को विदा करा लिया। मैं अब कभी ऐसा नहीं करूंगा। जैसे ही उसकी प्रार्थना पूरी हुई, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया। इसके बाद पति-पत्‍नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। कहते हैं उस दिन के बाद से पति-पत्‍नी नियमपूर्वक प्रदोष का व्रत रखने लगे। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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