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लक्षद्वीप के लिए भी पाकिस्तान की नीयत हुई थी खराब, थोड़ी देर होती तो भारत के हाथ से निकल जाता

Written By: Malaika Imam @MalaikaImam1 Published : Jan 08, 2024 09:47 pm IST, Updated : Jan 08, 2024 09:47 pm IST

भारत का विभाजन हुआ तब लक्षद्वीप पर दोनों में से किसी का भी कब्जा नहीं था। हालांकि, आजादी मिले अभी महीना भर भी नहीं हुआ था कि अगस्त के आखिर में पाकिस्तान ने लक्ष्यद्वीप पर कब्जा जमाने का मन बना लिया।

आजादी के बाद...- India TV Hindi
आजादी के बाद लक्षद्वीप को भारत में शामिल किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप गए थे। उन्होंने द्वीप पर बिताए पलों की तस्वीरें शेयर की। इसके बाद सोशल मीडिया पर लक्ष्यद्वीप की तुलना मालदीव से होने लगी और फिर एक नई बहस छिड़ गई। मालदीव सरकार के मंत्रियों की ओर से आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ये कहने की कोशिश हुई कि मालदीव की तुलना लक्षद्वीप से करना ठीक नहीं है। लेकिन क्या आपको पता है कि 1947 में जब आजादी मिली, तो पक्का नहीं था कि लक्षद्वीप भारत का हिस्सा होगा, क्योंकि पाकिस्तान के कायदे आजम मोहम्मद अली जिन्ना इसे हड़पने की फिराक में थे। 

भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ, तब लक्षद्वीप पर दोनों में से किसी का भी कब्जा नहीं था। चूंकि जिन्ना चाहते थे कि हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ मुस्लिम बहुल होने के चलते पाकिस्तान में शामिल हो जाए, लेकिन भारत के तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी सूझबूझ से इन रियासतों को भारत में मिलाया। जब ये सूबे भारत में शामिल किए जा रहे थे, तब लक्ष्यद्वीप बचा हुआ था। लक्ष्यद्वीप दूर-दराज स्थित था, इसलिए किसी की नजर वहां तक नहीं गई। तब बांग्लादेश भी पाकिस्तान का हिस्सा था और पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा

Image Source : PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा
 

पाकिस्तान के धावा बोलने से पहले पटेल का हुक्म

देश को आजादी मिले अभी महीना भर भी नहीं हुआ था कि अगस्त के आखिर में पाकिस्तान ने सोचा कि मुस्लिम बहुल होने की वजह से क्यों ना लक्ष्यद्वीप पर कब्जा कर लिया जाए। पाकिस्तान ने अपना एक युद्धपोत लक्षद्वीप के लिए रवाना कर दिया। इस दौरान सरदार पटेल का भी ध्यान लक्ष्यद्वीप की ओर गया। फिर क्या उन्होंने मन बना लिया कि किसी भी सूरत में लक्षद्वीप पर पाकिस्तान का अधिकार नहीं होने देंगे। उन्होंने दक्षिणी रियासत के मुदालियर भाइयों से कहा कि वे सेना लेकर फटाफट लक्षद्वीप निकल जाए। रामास्वामी और लक्ष्मणस्वामी मुदालियर वहां पहुंचे और तुरंत तिरंगा लहरा दिया। 

तिरंगा देख दबे पांव लौटी पाकिस्तानी सेना

बताया जाता है कि तिरंगा लहराए जाने के कुछ ही देर बाद पाकिस्तान का युद्धपोत भी वहां पहुंचा, लेकिन भारतीय झंडा देखते ही वे दबे पांव वापस लौट गए। तब से लक्षद्वीप भारत का अभिन्न अंग है। उस समय लक्षद्वीप का नाम 'लक्कादीव-मिनिकॉय-अमिनीदिवि द्वीप' था। 1956 में भारत सरकार ने यहां के सभी द्वीपों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया और 1973 में इन द्वीपसमूहों का नाम लक्षद्वीप कर दिया गया। 

आजादी के बाद लक्षद्वीप को भारत में शामिल किया गया।

Image Source : INDIATV
आजादी के बाद लक्षद्वीप को भारत में शामिल किया गया।

भारतीय पर्यटकों को 6 द्वीपों पर जाने की अनुमति 

लक्षद्वीप भारत के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में केरल से सटे अरब सागर में स्थित है। लक्षद्वीप के शाब्दिक अर्थ पर जाएं तो लाख द्वीप होगा। अधिकारिक आंकड़ों में लक्षद्वीप कुल 36 द्वीपों को मिलाकर बना द्वीप-समूह है। हालांकि, इनमें से 10 द्वीपों पर ही आबादी रहती है, जबकि भारतीय पर्यटकों को सिर्फ 6 द्वीपों पर जाने की अनुमति है। वहीं, विदेशी पर्यटकों को केवल दो द्वीपों पर जाने की इजाजत है। लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए सीधे केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। केरल से लक्षद्वीप के लिए सीधे जा सकते हैं।

भारत के लिए लक्षद्वीप अहम क्यों?

भारत की सुरक्षा के लिहाज से लक्षद्वीप काफी अहम है। लक्षद्वीप 32 स्क्वायर किलोमीटर में फैला है, लेकिन इसके कारण भारत को समुद्र के 20000 स्क्वायर किलोमीटर तक एक्सेस मिल जाता है। चूंकि, 1982 में यूनाइटेड नेशंस लॉ ऑफ सी कंवेंशन्स के नियमों के मुताबिक, किसी देश के तट से 12 नॉटिकल माइल्स यानी 22KM तक के एरिया पर उसी देश का अधिकतर होगा, जिसके चलते लक्षद्वीप भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। मतलब यहां से दूर-दूर तक के जहाजों पर नजर रखी जा सकती है। चीन के बढ़ते समुद्री दबदबे के बीच भारत लक्षद्वीप में मजबूत बेस तैयार कर रहा है, ताकि समुद्र में हो रही एक्टिविटी पर नजर रखी जा सके। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा

Image Source : PTI
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्षद्वीप दौरा

लक्षद्वीप जाने के लिए परमिट? 

हालांकि, लक्षद्वीप जाने के लिए भारतीयों को भी परमिट की जरूरत होती है। लक्षद्वीप टूरिज्म की वेबसाइट के मुताबिक, ऐसा वहां मौजूद आदिवासी समूहों की सुरक्षा और उनके कल्चर को बचाए रखने की दृष्टि से किया गया है। वेबसाइट के  मुताबिक, द्वीप पर 95% आबादी एसटी है। यूनियन टेरिटरी एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ लक्षद्वीप में स्पष्ट है कि सिर्फ सेना के जवान जो वहां काम कर रहे हों, उनके परिवार और सरकारी अधिकारियों को इस परमिट में छूट मिल सकती है।

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