1. Hindi News
  2. हरियाणा
  3. चिराग योजना: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एजुकेशन का सपना या गरीब बच्चों के साथ बड़ा छलावा?

चिराग योजना: प्राइवेट स्कूलों में फ्री एजुकेशन का सपना या गरीब बच्चों के साथ बड़ा छलावा?

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jan 31, 2026 11:55 pm IST,  Updated : Jan 31, 2026 11:55 pm IST

हरियाणा के अभिभावक इस योजना को गरीब बच्चों के साथ छलावा बता रहे हैं। इस योजना के तहत पात्र छात्रों को मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा दी जाएगी और उनका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

students- India TV Hindi
स्कूल जाते स्टूडेंट्स Image Source : PTI

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार की चिराग योजना को लेकर इन दिनों विवाद हो रहा है। सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के उद्देश्य से चिराग योजना को लागू किया है। हाल ही में सरकार ने इसकी पात्रता सीमा बढ़ाकर 8 लाख रुपये सालाना आय कर दी है, जिससे करीब 32 लाख परिवारों को लाभ मिलने का दावा किया जा रहा है। लेकिन धरातल पर तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है।

क्या है चिराग योजना?

दरअसल, इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे गरीब बच्चों को मान्यता प्राप्त प्राइवेट योजना में दाखिला दिलाना है। नियमानुसार इन छात्रों की पूरी फीस का भुगतान राज्य सरकार करेगी। इसलिए सत्र 2026-27 के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय ने 28 जनवरी को ही सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को एडमिशन का आदेश जारी कर दिया है।

विरोध की गूंज

वहीं इस योजना को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। 'हरियाणा अभिभावक एकता मंच' और 'ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन' ने इस योजना को भ्रामक बताया है। इस मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा और महासचिव कैलाश शर्मा का आरोप है कि सरकार शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को ठीक से लागू करने के बजाय इस नई योजना के जरिए उसे कमजोर कर रही है।

अभिभावकों का तर्क है कि प्राइवेट स्कूलों की इस योजना रुचि नहीं ले रहे। बड़े सीबीएसई (CBSE) स्कूल इस योजना में शामिल ही नहीं हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, फरीदाबाद का एक भी सीबीएसई स्कूल इस योजना से नहीं जुड़ा है।

बेहद सीमित विकल्प

जिससे छात्रों के पास बेहद सीमित विकल्प हैं। क्योंकि फरीदाबाद जैसे बड़े जिले में केवल 4 हरियाणा बोर्ड के स्कूल ही इस योजना से जुड़े हैं, जो बच्चों की संख्या के मुकाबले ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। वहीं छात्र चाहते हैं कि उन्हें शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों की 25% आरक्षित सीटों पर दाखिला मिले, लेकिन सरकार स्कूलों पर इस कानून को मानने के लिए दबाव नहीं बना पा रही है।

मामला तब और गंभीर हो गया जब शिक्षा सत्र 2025-26 में फरीदाबाद के 28 सीबीएसई स्कूलों ने आरटीई के तहत चिन्हित बच्चों को दाखिला देने से साफ मना कर दिया। जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत और एनओसी रद्द करने की सिफारिश के 6 महीने बाद भी मुख्यालय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने सीएम और मुख्य सचिव को लीगल नोटिस भेजकर जवाब मांगा है और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। हरियाणा से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।