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सेना ने कहा, कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में एंटी-फाइब्रोटिक दवा कारगर

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Aug 22, 2020 09:42 pm IST,  Updated : Aug 22, 2020 09:42 pm IST

सेना ने दावा किया कि देश में पहली बार पुणे के 4 मरीजों पर करोना वायरस की वजह से फेफड़ों में उत्पन्न फाइब्रोसिस और सांस लेने में परेशानी का इलाज करने के लिए एंटी-फाइब्रोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया गया और इसने काम भी किया।

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सेना ने दावा किया है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में एंटी-फाइब्रोटिक दवा कारगर है। Image Source : PTI REPRESENTATIONAL

मंबई: सेना ने दावा किया कि देश में पहली बार पुणे के 4 मरीजों पर करोना वायरस की वजह से फेफड़ों में उत्पन्न फाइब्रोसिस और सांस लेने में परेशानी का इलाज करने के लिए एंटी-फाइब्रोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया गया और इसने काम भी किया। एक प्रेस रिलीज के जरिए सेना ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘पुणे स्थित आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोथोरासिस साइंसेज (AICTS) के शोधकर्ताओं ने पाया कि यह पद्धति कोविड-19 मरीजों के इलाज में बहुत ही प्रभावी है और वे इसका सहन भी कर सकते हैं।’

सेना ने कहा, ‘कोविड-19 मरीजों के उपवर्ग में ‘लंग फाइब्रोरिस’ (इस बीमारी में फेफड़ों के ऊत्तकों को जोड़ने के लिए बहुत ही ज्यादा रेशे बन जाते हैं जिससे सांस लेने में परेशानी होती है) के इलाज के लिए नई रणनीति है। ये शुरुआती नतीजे हैं और इस क्षेत्र में और रीसर्च किया जा रहा है ताकि उन मरीजों की पहचान की जा सके जिन्हें इस पद्धति से लाभ हो सकता है।’ सेना ने बताया कि वैज्ञानिकों को 4 मरीजों का ऐसी दवाओं से इलाज करने में सफलता मिली है जो गंभीर लंग फाइब्रोसिस की वजह से ऑक्सीजन लेने में मुश्किल का सामना कर रहे थे। चारों मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

सेना की इस प्रेस रिलीज में कहा गया कि यह देखा गया कि कोविड-19 के ऐसे मरीजों की पर्याप्त संख्या है जिनका गंभीर निमोनिया का इलाज चल रहा है और उन्हें लंग फाइब्रोसिस की बीमारी हो गई है। इसका मतलब है कि उनके फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे ऑक्सीजन धारण करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है। सेना ने कहा, ‘लंग फाइब्रोसिस से थकान, सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ जिंदगी भर ऑक्सीजन लेने की जरूरत पड़ सकती है।’

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