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कर्ज देने के लिये बैंकों, एनबीएफसी की 400 जिलों में होंगी खुली बैठकें: सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में 400 जिलों में बैंकों, एनबीएफसी और खुदरा कर्ज लेने वालों की आमने सामने खुली बैठकें होंगी जिनमें एनबीएफसी को बैंकों से खुले तौर पर नकदी उपलब्ध कराई जायेगी और वह उसे खुदरा कर्ज लेनदारों को वितरित करेंगे।

Bhasha Bhasha
Published on: September 19, 2019 21:45 IST
Finance Minister Nirmala Sitharaman- India TV Hindi
Image Source : PTI Finance Minister Nirmala Sitharaman addresses a press conference after a review meeting.

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था और विशेषतौर पर गैर- बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) में नकदी की तंगी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को कहा कि आने वाले दिनों में देशभर में 400 जिलों में बैंकों, एनबीएफसी और खुदरा कर्ज लेने वालों की आमने सामने खुली बैठकें होंगी जिनमें एनबीएफसी को बैंकों से खुले तौर पर नकदी उपलब्ध कराई जायेगी और वह उसे खुदरा कर्ज लेनदारों को वितरित करेंगे।

इस तरह की बैठकें तीन अक्ट्रबर से शुरू होंगी। इनका मकसद मकान खरीदारों और किसानों समेत कर्ज चाहने वालों को ऋण सुलभ कराना है। सूक्ष्म लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) भी इन बैठकों में कर्ज सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

वित्त मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में इन बैठकों के बारे में पहले चरण के लिये अब से लेकर 29 सितंबर और दूसरे चरण के लिये 10 से 15 अक्ट्रबर 2019 की तिथि बताई थी जिसे बैंक प्रतिनिधियों की पुन: हुई बैठक में सलाह-मशविरा के बाद बदल दिया गया।

अधिकारियों ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि पहले चरण में इस तरह की बैठकें तीन से सात अक्टूबर को तथा दूसरे चरण में 11 अक्टूबर 2019 से अगले कुछ दिन तक होगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके पीछे सोच यह है कि त्योहारों के दौरान लोगों को ज्यादा-से-ज्यादा कर्ज देना सुनिश्चित किया जा सके। दिवाली अक्टूबर में है और इसे देश में खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है। खुली बैठकों के दौरान खुदरा, कृषि और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों) और आवास एवं अन्य क्षेत्रों के लिये कर्ज उपलब्ध कराये जाएंगे। मंत्री ने बताया कि बैंकों से दबाव वाले किसी भी एमएसएमई कर्ज को 31 मार्च 2020 तक फंसा कर्ज (एनपीए) घोषित नहीं करने को कहा गया है।

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